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रहस्यों से भरा है खोखरा का नया तालाब,सुनाई देती है जंजीर के खड़कने की आवाज

खोखरा। किंवदतियों को लोग भले ही गुजरे जमाने की बात कहकर टाल जाते हैं लेकिन कभी कभी इन किंवदतियों की खोज ही हमें गुजरे जमाने की सभ्यता संस्कृति व रोचक बातों तक पहुंचने का रास्ता बतलाती है। कुछ ऐसी ही रोचक किंवदतियां हमने बुजुर्गों से सुनी थी की जिला मुख्यालय से लगे ग्राम खोखरा के नया तालाब के गहरे और साफ पानी से जंजीर घिसने की आवाजे सुनाई देती है। 


गांव के बड़े बुजुर्गों का मानना है की खोखरा के नया तालाब के तट पर गिरि सम्प्रदाय के द्वारा  निर्मित चूने और गुड़ से बना मठ नुमा शिव मंदिर है,जो किसी समय मे गिरि संतों का आश्रय हुआ करता था, जहां ये संत अपने दान पुण्य से अर्जित किए गहनों व सिक्कों को मंदिर के ठीक ऊपर बने मठ में रखा करते थे,ताकी अकस्मात मंदिर में आश्रय लेने आने वाले संतों के लिए दाल, चावल, वस्त्र वगैरह क्रय करके उनके रहने खाने की समुचित व्यवस्था की जा सके। पहले के जमाने में हंडे में इन बहुमूल्य रत्नों को सुरक्षित रूप से रखा जाता था। साथ ही उस हंडे की सुरक्षा के लिए कुछ अदृश्य जीव मंत्रों के प्रभाव से जीवित किए जाते रहे होंगे, जो उस हंडे की रक्षा करते थे। या यूं कहे की पहरेदारी के लिए कुछ अदृश्य ताकतों को जीवित कर रखे जाने की बात बुजुर्गो से सुनने को मिलती है।
नए युग में मठ नुमा मंदिर धीरे धीरे टूटता व जीर्ण शीर्ण होता गया। पुराने बुजुर्गों की माने तो जंगलों के कटने से और कोलाहल के बढने से गिरि सम्प्रदाय के संत जो पुराने थे, वो अपने हंडों को वही पास ही के तालाब में छोड़ दिए, जिनकी रक्षा का दायित्व उन्हीं अदृश्य शक्तियों या जीवों के पास रहा होगा। 

लोगों की माने तो  इस हंडे को पाने का प्रयास कई लोगों ने किया। कई लोगों ने हण्डे को पाने की कई तात्रिक क्रियाएं भी तट के  पास की ,लेकिन उस हण्डे तक कोइ नही पहुंच पाया। लोग केवल उस हण्डे के जंजीर की खनक की आवाज को ही ध्यान से सुन पाते है, लेकिन हण्डे तक पहुंचना किसी के लिए संभव नहीं हो सका  कुल मिलाकर यदि बात तरीके से तस्दीक की हो तो यह कहना उचित होगा की ये सब आधी कहानी आधा फसाना हो सकता है, लेकिन लोगों की आस्था आज भी इस वर्षो पुराने शिव मंदिर मे देखने को मिलती है, जिसकी दीवारे गुड और चूने से निर्मित है, जहां गिरि संतों ने अपने बहुमुल्य खजानों  को उसी हण्डे मे छिपाए होने की बात पुराने ग्रामीणो से सुनते आए हैं।

खोखरा के गिरि संतों का वो बहुत पुराना हण्डा लोगों के लिए आज भी कौतुहल का विषय बना हुआ है, जहां देर रात को उसके चलने की आवाजे तो सुनाई देती है, लेकिन हण्डे को देखना या पाना नामुमकिन सा है। कुछ लोगों ने रात में किसी चमकते हण्डे नुमा स्वरूर को देखा भी है ल,लेकिन उस तक पहुंच नहीं पाए। बहरहाल लोगो की किॆवदतियां कई पुरानी कथाओं का निचोड भी होता है, जिस पर विश्वास कर पाना कठिन तो है लेकिन सत्य की कसौटी पर खरे से उतरने वाले कुछ प्रमाणिक बाते मन के कौतुहल को बढा सी जाती है।

चैनल इंडिया के ब्यूरो राजेश राठौर ने नया तालाब मंदिर पहुंचकर और बहुत देर तक रूकने के बात माना की खोखरा के इस प्राचीन मठ नुमा शिवालय में कुछ तो ऐसा है जो अन्य मंदिरों से इस नया तालाब के मंदिर को कुछ अलग बनाता है। यहां की शांति और तालाब का साफ पानी बहुत मुश्किल से सुनाई देने वाली जंजीर की आवाज कुछ तो ऐसा है जिस पर पुरातात्वित विभाग को गहरी नींद से जगाने के लिए  इस मठनुमा मंदिर मे  बुलाया जा सके।

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