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जलकुंभी के जाल में कैद हुई घरघोड़ा की जीवनदायिनी बगमुड़ा तालाब

घरघोड़ा (गौरी शंकर गुप्ता) | नगर के हृदय स्थल पर स्थित ऐतिहासिक और जीवनदायिनी बगमुड़ा तालाब आज अपने वजूद के लिए छटपटा रहा है। जिस तालाब का जल कभी कांच की तरह निर्मल हुआ करता था और जो नगर की प्यास बुझाता था, आज वह प्रशासनिक उपेक्षा के चलते जलकुंभी का ‘डंपिंग यार्ड’ बनकर रह गया है। स्थिति यह है कि अब यहाँ पानी कम और जलकुंभी का हरा समंदर अधिक नजर आता है।



आस्था और परंपराओं पर प्रदूषण का ग्रहण

स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, बगमुड़ा तालाब केवल एक जल निकाय नहीं, बल्कि घरघोड़ा की सांस्कृतिक पहचान है। वर्षों से यहाँ छठ महापर्व, दुर्गा पूजा और गणेश विसर्जन जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन होते आए हैं। लेकिन वर्तमान में जलकुंभी के कारण पानी सड़ने लगा है और उससे उठने वाली दुर्गंध ने आसपास के रहवासियों का जीना दूभर कर दिया है। आस्था का यह केंद्र अब धीरे-धीरे कचरे के ढेर में तब्दील हो रहा है।तालाब की दुर्दशा को लेकर नगरवासियों का आक्रोश प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर फूट रहा है। लोगों का आरोप है कि समय-समय पर जब भी इस मुद्दे को उठाया जाता है, तो नगर पंचायत अमला हरकत में तो आता है, लेकिन कार्रवाई केवल औपचारिकताओं तक सिमट जाती है। अधिकारियों द्वारा सफाई के नाम पर केवल फोटो खिंचवाकर औपचारिकता पूरी कर ली जाती है, जबकि जलकुंभी के स्थायी उन्मूलन के लिए कोई ठोस योजना आज तक धरातल पर नहीं उतर सकी है।

हादसों को न्योता देती बदहाली

तालाब की मौजूदा स्थिति सुरक्षा के लिहाज से बेहद चिंताजनक हो गई है। जलकुंभी की घनी और मोटी परत के कारण पानी की गहराई का अंदाजा लगाना असंभव है। यह स्थिति यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं और मासूम बच्चों के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। साथ ही, सूर्य की रोशनी पानी के भीतर न पहुँच पाने के कारण जलीय जीवन और पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह समाप्त होने की कगार पर है।

नगरवासियों ने की सौंदर्यीकरण की मांग

नगर के प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि केवल ऊपरी सफाई से काम नहीं चलेगा। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाने की आवश्यकता है:

  • मशीनीकृत सफाई: आधुनिक मशीनों के जरिए जलकुंभी का जड़ से खात्मा किया जाए।
  • स्थायी समाधान: जलकुंभी को दोबारा फैलने से रोकने के लिए जाल या अन्य तकनीकों का उपयोग हो।
  • पर्यटन विकास: तालाब के चारों ओर पचरी निर्माण, लाइटिंग और सौंदर्यीकरण कर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए।

अब देखना यह होगा कि नगर का जिम्मेदार प्रशासन इस धरोहर को बचाने के लिए कब गंभीर कदम उठाता है, या फिर यह ऐतिहासिक धरोहर फाइलों और फोटोबाजी में ही दफन होकर रह जाएगी।

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