सरकारी प्रेस ने टेण्डर के बिना बांट दिए तीन सौ करोड़ के काम! – 2021 के बाद नहीं बुलाए गए टेण्डर – मशीनें पुरानी व स्टॉफ नहीं होने से बाहर से कराया काम

रायपुर। मशीनें पुरानी व स्टॉफ नहीं होने के कारण संचालक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री कार्यालय ने टेंडर आमंत्रित किए बिना बाहरी निविदाकारों से 295 करोड़ 60 लाख 934 रुपए के काम करा लिए तथा उनका भुगतान भी कर दिया गया। यह काम बीते पांच सालों में कराए गए हैं। विभाग का तर्क है कि विभिन्न विभागों की मुद्रण सम्बंधी शत-प्रतिशत मांग पूरी करने के लिए ऐसा किया गया है।
विधानसभा के मानसून सत्र में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से राज्य सरकार पर आरोप लगाया गया कि 2020 से 2021 के बीच केवल एक बार निविदा आमंत्रित की की। विभाग में मिलीभगत से प्रतिस्पर्धा के बिना निविदाकारों को करोड़ों रुपए के कार्य किए गए। ऐसा करके सरकार के खजाने को अरबों रुपए की क्षति पहुंचाई गई।
इसके जवाब में सरकार की तरफ से जवाब दिया गया कि चिप्स के माध्यम से संचालक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री कार्यालय ने जनवरी 2021 में ऑन लाइन निविदा आमंत्रित की गई थी। निविदा के माध्यम से पांच निजी मुद्रकों को विभाग में अनुबंधित किया गया। सरकार ने बताया कि संचालक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री के अंतर्गत शासकीय मुद्रणालयों का स्वयं का सेटअप है परंतु स्वीकृत 340 पदों के विरुध्द मात्र ६८ पद भरे हैं। शेष 272 पद रिक्त हैं। अत: स्वीकृत पद के विरुध्द सिर्फ 20 प्रतिशत पद ही भरे हैं। इसके अलावा मुद्रणालय में स्थापित मशीनें भी पुरानी हो चुकी हैं। इससे विभागों की मुद्रण सम्बंधित शत-प्रतिशत मांगें पूरी नहीं हो पाती हैं।
सरकार ने बताया कि इन्हीं कारणों से संचालक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री कार्यालय से अनुबंधित निविदाकारों को उनकी क्षमता अनुसार विभागों के काम बांटे गए। सरकार ने यह भी बताया कि वर्ष 2021 में तीन कैटेगरी में निविदा आमंत्रित की गई थी, जिसमें कैटेगरी ए में सात फर्म, कैटेगरी बी में दस फर्म तथा कैटेगरी सी मं पांच फर्मों ने निविदा प्रस्तुत की। इनमें कैटेगरी ए में पांच फर्म, कैटेगरी बी में चार फर्म तथा कैटेगरी सी में तीन फर्म सफल रहे, जिन्हें उनकी क्षमता के अनुसार कार्य आवंटित किया जाता है। सरकार ने यह भी कहा है कि शासकीय मुद्रणालय द्वारा नियमानुसार व शासनहित में मुद्रण कार्य कराया जाता है।
