श्री चंद्रशेखर विजय जी महाराज साहेब की चौदहवीं स्वर्गारोहण तिथि पर मुनि श्री प्रियदर्शी विजय जी ने किया श्रद्धांजलि अर्पित
रायपुर। सोमवार 4 अगस्त श्रावण सूद दशम के दिन, पूज्यपाद पन्यास प्रवर श्री चंद्रशेखर विजय जी महाराज साहेब की चौदहवीं स्वर्गारोहण तिथि के अवसर पर, मुनि श्री प्रियदर्शी विजय जी महाराज ने उनके जीवन और उनके द्वारा किए गए अत्यधिक योगदानों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में श्रद्धालुओं ने श्री महाराज साहेब की महान साधना और समाज के लिए किए गए उनके अति महत्वपूर्ण कार्यों को स्मरण किया और श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
श्री चंद्रशेखर विजय जी महाराज का जन्म मुंबई के ईर्ला (अंधेरी – पार्ला मध्य भाग) में हुआ था। वे गुजरात के राधनपुर के मूल निवासी थे और एक समृद्ध परिवार से संबंध रखते थे। मात्र 18 वर्ष की आयु में उन्होंने संयम के मार्ग को अपनाया और जैन धर्म की सेवा में अपने जीवन को समर्पित कर दिया। उनकी माता ने उनके जन्म से पहले ही संकल्प लिया था कि वह अपने पुत्र को जैन धर्म की सेवा में समर्पित करें। दिक्षा प्राप्त करने के बाद, उन्होंने 25,000 से अधिक श्लोकों को कंठस्थ किया और जैन धर्म के अनेक ग्रंथों का गहन अध्ययन किया। प्रवचन के माध्यम से उन्होंने धर्मभ्रष्ट युवाओं को धर्म के रास्ते पर लाया और समाज में धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ाई। श्री चंद्रशेखर विजय जी महाराज का एक प्रमुख उद्देश्य था अबोल पशुओं को कसाईखानों से बचाकर उन्हें पांजरापोलों में सुरक्षित करना। इसके लिए उन्होंने करोड़ों रूपयों की पूंजी एकत्रित कर जैन समाज से सहयोग प्राप्त किया और कई संस्थाओं की स्थापना की। उनकी पहल पर युवाओं के भटकने से बचने के लिए वीर सैनिक दल, संस्कार धाम और संस्कृति रक्षक दल जैसी संस्थाओं की शुरुआत की गई। उन्होंने बच्चों में धर्म और राष्ट्रप्रेम का बीजारोपण करने के लिए गुजरात में दो विशाल तपोवन संस्थाओं की स्थापना की, जहाँ बच्चों को जीवन के महत्वपूर्ण संस्कार दिए जाते हैं।
इसके अलावा, उन्होंने समाज के विभिन्न संकटों के समय जैसे भूकंप, बाढ़, महामारी आदि में भी अपने दान से करोड़ों रुपये का फंड एकत्रित किया और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई। श्वेताम्बर जैन समाज के अति प्राचीन तीर्थ अंतरिक्ष जी (शिरपुर, महाराष्ट्र) में भी उन्होंने 3 वर्षों तक चातुर्मास किया और जैन समाज को तीर्थ रक्षा के लिए प्रेरित किया।
श्री चंद्रशेखर विजय जी महाराज ने गरीब और बेसहारा लोगों के लिए महावीर खिचड़ी केंद्र और छाछ केंद्र जैसे कई जनकल्याणकारी प्रकल्पों की स्थापना की, जो आज भी गुजरात में पूरी तन्मयता से चल रहे हैं। इसके अलावा, नए और पुराने कसाईखानों को अत्याधुनिक बनने से रोकने के लिए उन्होंने कड़े कदम उठाए और समाज के हित में सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों के विरोध में अनशन भी किया। आज, हम उनके महान योगदानों को याद कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। उनका जीवन एक प्रेरणा है और समाज के प्रति उनकी निष्ठा और सेवा का कोई विकल्प नहीं।
सर्वेधर्मो जगतां गुरु: श्री चंद्रशेखर विजय जी महाराज की पुण्यतिथि पर उनका योगदान सदैव हमारे दिलों में जीवित रहेगा।
विशेष कार्यक्रम: प्रतिदिन सुप्रभात अभिषेक प्रातः 6 से 6.25, प्रतिदिन प्रातः 9 से 10 गुरु भगवंत द्वारा प्रवचन
महिलाओं के लिए प्रतिदिन विशेष साध्वी भगवन्तों का प्रवचन 2.30 से 3.30 तक
