April 26, 2026

डिजिटल क्रांति से बदली किसानों की तस्वीर: बिचौलियों का खेल खत्म, मुआवजा अब सीधे खातों में

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Raigarh Collectorate

रायगढ़ (गौरी शंकर गुप्ता)। रायगढ़ जिले में किसानों के मुआवजा वितरण की व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले बिचौलियों की दखलंदाजी और लंबी कतारों के कारण किसानों को महीनों तक इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मुआवजा राशि सीधे उनके बैंक खातों में पहुंच रही है। इस नई व्यवस्था ने न केवल पारदर्शिता बढ़ाई है, बल्कि किसानों का समय और श्रम भी बचाया है। जिले के कलेक्टर द्वारा इस डिजिटल योजना का औपचारिक शुभारंभ किया गया। हाल ही में बाढ़, सूखा और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित 25 हजार से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल चुका है। किसानों को प्रति हेक्टेयर 10,000 से 20,000 रुपये तक का मुआवजा मात्र 48 घंटों के भीतर उनके आधार-लिंक्ड बैंक खातों में मिल रहा है। अब किसान ‘किसान मित्र’ ऐप और सरकारी पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर रहे हैं। जियो-टैगिंग और ड्रोन सर्वे के जरिए फसल नुकसान का सटीक सत्यापन किया जा रहा है, जिससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना खत्म हो गई है। इस नई व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई है। पहले ये बिचौलिए 10 से 20 प्रतिशत तक कमीशन वसूलते थे और कागजी प्रक्रिया में हेराफेरी करते थे। प्रशासन द्वारा ऐसे 15 से अधिक बिचौलियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।



ग्राम पंचायतों और किसान संगठनों के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे किसान डिजिटल प्रक्रिया को आसानी से समझ और अपना रहे हैं। कलेक्टर ने इसे डिजिटल इंडिया की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए कहा कि अब अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पारदर्शिता के साथ पहुंच रहा है। तकनीकी रूप से यह प्रणाली छत्तीसगढ़ सरकार की ‘नरवा, गरवा, घुरवा, बारी’ योजना से जुड़ी हुई है। किसान ऐप पर फसल का सर्वे अपलोड करते हैं, ई-कोश प्रणाली द्वारा सत्यापन होता है और आरटीजीएस के माध्यम से तत्काल भुगतान कर दिया जाता है। राज्य स्तर पर अब तक लगभग 80 प्रतिशत मुआवजा वितरण डिजिटल माध्यम से किया जा चुका है। बुजुर्ग और तकनीकी रूप से कमजोर किसानों के लिए कॉमन सर्विस सेंटरों में सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, वहीं हेल्पलाइन नंबर भी सक्रिय हैं। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या अभी भी एक चुनौती बनी हुई है, जिसे दूर करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों की प्रतिक्रियाएं भी बेहद सकारात्मक हैं। पुधनपाली के किसान रामू यादव ने बताया कि पहले 15 दिनों तक इंतजार करना पड़ता था, जबकि अब मात्र दो दिनों में राशि मिल जाती है। महिला किसान सीता ने कहा कि ऐप उपयोग में आसान है और अब बिचौलियों की जरूरत नहीं रही। इस डिजिटल बदलाव का आर्थिक प्रभाव भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। तेजी से मुआवजा मिलने से किसान कर्ज से उबर रहे हैं और नई फसल के लिए निवेश कर पा रहे हैं। रायगढ़ अब एक उभरते हुए कृषि हब के रूप में सामने आ रहा है और यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकता है।

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