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कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, अटैचमेंट खत्म हुआ, मूल पदस्थापना पर एक सप्ताह में लौटें वर्ना नहीं मिलेगी सैलरी

स्कूल शिक्षा विभाग के गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों और भृत्यों के संलग्नीकरण (अटैचमेंट) को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है। संचालनालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी कर्मचारी एक सप्ताह के भीतर अपनी मूल पदस्थ संस्था या कार्यालय में कार्यभार ग्रहण करें। इसके साथ ही, कर्मचारियों को वीएसएसके (VSSK) एप के माध्यम से नियमित ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य होगा।



डीपीआई ने इस संबंध में पूर्व में लगातार आदेश जारी किए थे। इन निर्देशों के बावजूद, कई कर्मचारी अब भी संलग्न कार्यालयों में ही कार्यरत पाए गए। इसे गंभीरता से लेते हुए संचालनालय ने अब अंतिम आदेश जारी कर दिया है और सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को एक सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं।

यह प्रशासनिक निर्णय स्कूल शिक्षा विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा। अक्सर कर्मचारियों के मूल पदस्थापना से दूर रहने के कारण संबंधित कार्यालयों व स्कूलों में कामकाज बाधित होता है। अब ‘वीएसएसके’ एप के अनिवार्य उपयोग से उपस्थिति में पारदर्शिता आएगी। जिला शिक्षा अधिकारियों को अनुपालन रिपोर्ट भेजने के निर्देश से यह सुनिश्चित होगा कि यह आदेश केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि धरातल पर क्रियान्वित हो, जिससे शिक्षण व्यवस्था की प्रशासनिक नींव और अधिक सुदृढ़ हो सकेगी।

दरअसल, कुछ साल पहले विधानसभा में एक सवाल पूछा गया था कि कितने शिक्षक या स्टाफ मूल काम के बजाय दूसरी जगह अटैच है। तब सरकार की ओर से बताया गया था आंकड़ा 9 हजार के पार है।

इसे लेकर एक अधिकारी ने भी पुष्टि की कि आंकड़ा 10 हजार के पार है। मामला को लेकर सरकार का भी स्पष्ट निर्देश है अटैचमेंट खत्म होगा वरना तनख्वाह नहीं मिलेगी।

जहां पदस्थापना, वहीं से लगेगी हाजिरी

शिक्षा विभाग ने 1 जुलाई से शिक्षक, बाबू, चपरासी, जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी समेत पूरे अमले के लिए ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य कर दी है। व्यवस्था की सबसे अहम शर्त यह है कि हाजिरी केवल उसी स्कूल या कार्यालय से लगेगी, जहां कर्मचारी की वास्तविक पदस्थापना है।

यही शर्त वर्षों से चल रहे संलग्नीकरण के खेल पर भारी पड़ गई। हाजिरी नहीं लगाने पर वेतन रोकने के निर्देश के बाद अब जिलों से गायब कर्मचारियों की सूची मुख्यालय भेजी जा रही है। इससे उन रसूखदारों में खलबली मच गई है जो 10-10 साल से दूसरे विभागों में मलाई काट रहे थे, जबकि उनका वेतन शिक्षा विभाग के बजट से निकल रहा है।

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