दिल्ली में पर्यटन को नई दिशा: अक्षरधाम से शुरू हुए चार नए सर्किट, धार्मिक-ऐतिहासिक स्थलों को जोड़ने की पहल

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली की धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाने के लिए दिल्ली सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को अक्षरधाम मंदिर परिसर में आयोजित ‘आध्यात्मिक एवं विरासत पर्यटन सम्मेलन 2026’ के दौरान चार नए टूरिज्म सर्किट का शुभारंभ किया।
दिल्ली सरकार के पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव भी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान अक्षरधाम परिसर में हेरिटेज वॉक का आयोजन किया गया। इसमें शामिल लोगों को राजधानी की ऐतिहासिक इमारतों, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े पहलुओं के बारे में जानकारी दी गई।
एक यात्रा में कई विरासत स्थलों का अनुभव
नए पर्यटन सर्किट तैयार करने के पीछे सरकार का उद्देश्य दिल्ली के प्रमुख धार्मिक स्थलों को ऐसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थानों से जोड़ना है, जिन्हें अब तक पर्यटकों के बीच अपेक्षित पहचान नहीं मिल पाई है। इन रूट्स के जरिए पर्यटकों को एक ही यात्रा में दिल्ली की आध्यात्मिक परंपराओं के साथ-साथ शहर के इतिहास और संस्कृति को समझने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अक्षरधाम परिसर में इस पहल की शुरुआत को विशेष अवसर बताया। वहीं, सद्गुरु ने अक्षरधाम मंदिर के दर्शन किए और परिसर की आध्यात्मिक विशेषताओं की सराहना की।
सोशल मीडिया के जरिए देश-दुनिया तक पहुंचाने की तैयारी
नए सर्किट को लोकप्रिय बनाने के लिए सरकार डिजिटल माध्यमों का भी सहारा ले रही है। 12 अगस्त को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और यूट्यूबर्स को इन पर्यटन मार्गों का भ्रमण कराया जाएगा। इनके जरिए संबंधित स्थलों के वीडियो, फोटो और रील्स सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाएंगे।
सरकार को उम्मीद है कि डिजिटल प्रचार से युवा पर्यटकों और देश-विदेश के यात्रियों के बीच दिल्ली के इन नए पर्यटन मार्गों को लेकर रुचि बढ़ेगी।
फरवरी में भी लॉन्च किए गए थे चार हेरिटेज सर्किट
दिल्ली सरकार ने इससे पहले फरवरी 2026 में चार हेरिटेज-कल्चरल सर्किट शुरू किए थे। इनमें ‘दिल्ली की धरोहर’, ‘दिल्ली का दिल और विरासत’, ‘दिल्ली का रहस्य’ और ‘दिल्ली देखो दिल से’ शामिल हैं।
सरकार के मुताबिक, पर्यटन सर्किट के विस्तार का लाभ केवल पर्यटकों तक सीमित नहीं रहेगा। पर्यटकों की संख्या और दिल्ली में उनके ठहरने की अवधि बढ़ने से स्थानीय गाइड, परिवहन क्षेत्र, रेस्तरां, दुकानदारों तथा छोटे कारोबारियों के लिए भी आय और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
अक्षरधाम बना आयोजन का केंद्र
इस पहल के लिए अक्षरधाम परिसर को चुना जाना भी अपने आप में महत्वपूर्ण है। यह परिसर दिल्ली की धार्मिक और स्थापत्य पहचान का प्रमुख हिस्सा है और यहां भारतीय संस्कृति एवं वास्तुकला से जुड़े अनेक पहलुओं को देखा जा सकता है।
कार्यक्रम में बीएपीएस संस्था के प्रमुख और आध्यात्मिक गुरु महंत स्वामी महाराज ने सभी के कल्याण, अच्छे स्वास्थ्य और नैतिक जीवन की कामना की। कार्यक्रम के आयोजन में अक्षरधाम के कार्यवाहक संत मुनिवत्सल स्वामी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
दिल्ली सरकार की इस पहल का व्यापक उद्देश्य राजधानी को केवल ऐतिहासिक स्मारकों के शहर के रूप में नहीं, बल्कि आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन के एक समग्र गंतव्य के तौर पर स्थापित करना है।



