देवशयनी एकादशी पर क्या करें और क्या नहीं, जानिए महत्व और जरूरी नियम

25 जुलाई, शनिवार को देवशयनी एकादशी है। हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व होता है। एक वर्ष में कुल 24 एकादशी व्रत रखा जाता है जिसमें आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी, हरिशयनी और आषाढ़ी एकादशी के नाम से जाना जाता है। एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष महत्व होता है। देवशयनी एकादशी पर व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने के कई तरह नियम होते हैं जिनका पालन करना अनिवार्य माना जाता है। आइए जानते हैं देवशयनी एकादशी के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
देवशयनी एकादशी पर क्या करें
– देवशयनी एकादशी का व्रत रखने के एक दिन पहले व्रत के नियमों का पालन शुरू हो जाता है। एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
– स्नान करने के बाद भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
– एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा में भोग लगाते समय तुलसी दल जरूर रखें।
– देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के साथ विष्णु मंत्र, विष्णु सहस्त्रनाम और गीता का पाठ करें।
– देवशयनी एकादशी पर विष्णु जी को शयन के लिए शयन मंत्र जरूर करें।
– देवशयनी एकादशी पर दान करने का खास महत्व होता है। इस दिन अन्न, कपड़े, धन और छाता आदि का दान करें।
– एकादशी पर सात्विक भोजन करें।
– एकादशी पर रात्रि जागरण करते हुए भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
– एकादशी व्रत रखने के बाद अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर व्रत का पारण जरूर करें।
देवशयनी एकादशी पर कौन सा काम नहीं करना चाहिए
– एकादशी का व्रत रखने वालों को दशमी तिथि लेकर द्वादशी तिथि तक मांस-मदिरा और तामसिक भोजन करने से बचें।
– एकादशी का व्रत रखने वालों को अन्न और नमक का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
– एकादशी के दिन वाद-विवाद से बचें और किसी पर क्रोध बिल्कुल ना करें।
– एकादशी पर चावल का सेवन करने से बचें।
– एकादशी पर अशुद्ध भोजन करने से बचें।


