घरघोड़ा क्षेत्र बना जुआरियों का जन्नत, खुलेआम चल रहा खुड़खुड़िया जुआ ?
घरघोड़ा (गौरी शंकर गुप्ता)। फेदपोश जिम्मेदार नौकरशाह ही समाज को धुमिल करने लगे पहरेदार ही अवैध धंधों को खुली छूट देकर रेवड़ी खाने में लगे तब समाज की भविष्य पर चिंता करना लाजिमी है, समाज के पहरेदार ही समाज को खोखला करने में महत्ती भूमिका अदा करने लगे तब सरकारी तंत्र से दुर्गंध आने लगती है, साय सरकार के सबसे होनहार मंत्री माने जाने वाले ओपी चौधरी के गृह जिले का यह हाल ए सूरत घरघोड़ा तहसील क्षेत्र का है जहां सूत्रधार बताते हैं शासकीय राशन संचालक भी खुलेआम जुआ खुड़खुडिया चलता नजर आता है अनेक बार फोटो भी वायरल हुआ वहीं शर्मशार समाज तब होती है जब जनप्रतिनिधि जैसे जिम्मेदार पदों में बैठे प्रमुख प्रतिनिधि भी खुड़खुड़िया जुआ के पाशों को चालते नजर आते हैं, समाज को दिशा देने वाले ही समाजिक बुराई को बल देते है, वहीं शासन की नितियों को खंडित करता प्रशासनिक नौकरशाह बेलगाम होती प्रतित होता है, बेखौफ होकर जिस तरह से गांव गांव बस्ती बस्ती खुड़खुड़िया जुआ का चलन सरेआम हो रही है, ऐसा लगता है अब यह क्षेत्र जुआ नशे का संरक्षित क्षेत्र बनता जा रहा है, जिन हाथों में सरकारी योजनाओं को जन जन तक पहुंचाना है सरकार की महत्वाकांक्षी योजना खाद्यान्न वितरण का क्रियान्वयन करना है वह समाज को अंधकारमय करने में लगा है, जुआ जैसे समाजिक बुराई को नव निहाल युवा पीढ़ी के सामने खुलेआम परोशा जा रहा है, घरघोड़ा जैसे उद्योगीक क्षेत्र में दो नंबर के कार्य अवैध धंधा गुंडागर्दी के काले साम्राज्य को कानून के रखवालों का खुला समर्थन मिलना भयावाह भविष्य की तसबीर तय करती नजर आती है, नशे जुऐ के आदि बनते जा रहे युवा पीढ़ी अपराध की और बढ़ रहे या आगोश में फंस कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर अपने परिवार को तबाह करने में लगे हैं, सूत्र बताते हैं रायगढ़ जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं में नशे की लत दिनों दिन बढ़ती जा रही है, वहीं कम समय में पैसे कमाने के चक्कर में जुआ सट्टा खेलने में अपनी परिवार की जमा पूंजी तक दाव में लगा रहे हैं इसका नतीजा क़र्ज़, वस्तु गिरवी, जैसे भंवर जाल में बुरी तरह से फंसते हुए मानसिक रूप से ग्रसित हो रहे हैं।

स्वच्छ समाज की कल्पना करना कलयुग संभव होगा ?
भारतीय समाज अपने संस्कृति संस्कार व सांस्कृतिक धरोहर को संजोकर जीवन यापन करने वाला देश है, लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वच्छ समाज मानववाद की सुदृढ़ विचारों से व्यापक रूप से संविधान को सर्वोपरी की भाव वाला देश में जब संविधान का खुलेतौर पर धज्जियां उड़ाई जाती है, तब आम नागरिक के मन में संविधान के शक्तिहीन विचारधारा उत्पन्न होता है, इसका कुप्रभाव इस कदर हावी होती है कि जन तंत्र सिर्फ़ कागज़ी लगता है, कलयुग में सत्य के पक्ष में बने रहना भी गुनाह लगता है, आज जिस तरह से गांव के मेलों में जुआ सड़क पर मंदिरा खुलेआम बिकती है, नशे में फुहड़ता अनाचारी द्वारा नारी का स्वाभिमान बीच बाजार में उछाला जाता है तब भ्रष्ट तंत्र का खड़ा अभिमान है, रूपयों से खरीद लिए जाते हैं खून के रीश्ते, चंद पैसे में बिक जाते हैं यहां सरकारी दफ्तरों के एक एक किस्से, जुआ सट्टा कालाबाजारी का जोर है।
जुआ अक्ट का पालन नही, पुलिस प्रशासन के सरपरस्ती में जुआ ?
कहावत है ‘जुआ किसी का ना हुआ’ जिसका हुआ सो हुआ या तो वर्दी में लगा दाग या नौकरशाही में हुआ खेला लीला ? सूत्रों की जानकारी और हमारी ख़ोज प्रताल में छन कर यह बात सामने आई है कि घरघोड़ा क्षेत्र में जुआ जैसे सामाजिक बुराई पर प्रशासन मतलब एसडीएम तहसीलदार जैसे दण्डाधिकारी का बड़े बड़े बोर्ड चस्पा करने वाले जिम्मेदार अधिकारी झांकते तक नही है कानून व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की बड़ी बातें यें अपने ऐसी वाले कार्यालय तक सीमित रखते हैं, लोक प्रशासनिक सेवा के अधिकारी आमजन की सेवा में विश्वास ना कर उच्च व्यवस्था में आसित होते हैं ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे अपराध व सामाजिक बुराई की इनको भनक तक नही है बड़े बड़े उद्योग की सेवा में तत्पर अधिकारी शासन की योजनाओं को क्रियान्वित करने में रात दिन लगे हैं जैसे इस क्षेत्र के थाना प्रभारी अभी तक अपने प्रभार वाले क्षेत्रों से अनभिज्ञ हैं सोर्स व अपने धाकड़ सिपाही मुंशी के दम पर कानून व्यवस्था बनाने का कार्य सिर्फ थाना में बैठकर करने लगे हैं जबकि वास्तविकता यह कि तहसील कार्यालय हो या थाना घरघोड़ा क्षेत्र के लोग हमेशा त्रस्त रहते हैं बिना पैसे का कोई काम नही होता वहीं पैसे देकर जुआ खुडखुड़िया खुलेआम होते जनता देखती है, जुआ सट्टा व खुड़खुड़िया जैसे जहर को नश नश में युवाओं में भरने वाले नवल किशोर को अपनी सरपरस्ती देकर अपराध के भंवर जाल में जिम्मेदार वर्दी संरक्षण दे रहा हो गर तब समाज में पहरेदार से विश्वास खत्म होना लाजमी है।
इन्होंने क्या कहा
- ग्रांम साल्हेपाली निवासी – उद्धव राठिया
ने बताया सोसायटी संचालक राशनों में धांधली करता है, कम राशन प्रदाय किया जा रहा है, समय पर राशन वितरण नही होता है, सरपंच पंच सचिव को बार बार बोलने पर भी कोई सुनवाई नही होता है। - पंचायत राशनकार्डधारी संतोषी राठिया का कहना है उनका राशन डीलर जूआरी है, मेला सीजन में जूआ खेलना ही उसका काम रथे, गांव के लोग परेशान हैं मनमर्जी तरीके से चावल बांटकर चला जाता है, कुछ बोलने पर बैठे रहो अभी लाइन बंद हैं मैं क्या करूं बोलकर चला जाता है।
