पति के पक्ष में मिली तलाक की डिक्री हाईकोर्ट ने की रद्द, पत्नी की अपील मंजूर

बिलासपुर, 29 सितंबर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में फैमिली कोर्ट द्वारा पति के पक्ष में दी गई तलाक की डिक्री को निरस्त कर दिया है। डिवीजन बेंच ने पत्नी की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि पति द्वारा लगाए गए क्रूरता और परित्याग के आरोप पर्याप्त प्रमाण से साबित नहीं हुए।
मामला महासमुंद जिले के एक दंपती से जुड़ा है, जिनका विवाह 10 दिसंबर 2011 को हुआ था। पति ने पत्नी पर बार-बार विवाद करने, ससुराल पक्ष के साथ उचित व्यवहार नहीं करने और बिना पर्याप्त कारण मायके जाने जैसे आरोप लगाए थे। उसने पत्नी की पुलिस और घरेलू हिंसा संबंधी शिकायतों को भी मानसिक क्रूरता बताया था।
वहीं पत्नी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह वैवाहिक जीवन बनाए रखना चाहती थी। उसने ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने और मारपीट करने के आरोप लगाए।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि पति-पत्नी के बीच होने वाले सामान्य मतभेद, छोटी-मोटी कहासुनी या वैवाहिक जीवन के उतार-चढ़ाव को मात्र आधार पर क्रूरता नहीं माना जा सकता। इसी तरह परेशानी की स्थिति में पुलिस या अन्य कानूनी शिकायत करना भी अपने आप में मानसिक क्रूरता नहीं है।
कोर्ट ने माना कि इस मामले में पति द्वारा लगाए गए आरोप उस स्तर के नहीं हैं, जिनसे वैवाहिक संबंध जारी रखना असंभव हो जाए। इसके बाद हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के तलाक संबंधी आदेश को रद्द कर दिया।



