March 6, 2026

फ्लाईएश से परेशान ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, नवापारा में टीआरएन कंपनी के 8–10 ट्रक रोके

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घरघोड़ा (गौरी शंकर गुप्ता)। रायगढ़ जिले के नवापारा क्षेत्र में टीआरएन कंपनी के ओवरलोड फ्लाईएश वाहनों से सड़कों पर राख गिरने की समस्या को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश मंगलवार सुबह उस समय फूट पड़ा, जब उन्होंने टेंडा–नवापारा मार्ग पर 8 से 10 फ्लाईएश से लदे ट्रकों को रोककर प्रदर्शन किया। सुबह करीब 8 बजे शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन से सड़क मार्ग अवरुद्ध हो गया और आवागमन प्रभावित हुआ।



ग्रामीणों का आरोप है कि टीआरएन कंपनी के प्लांट से प्रतिदिन हजारों टन फ्लाईएश का परिवहन किया जा रहा है, लेकिन वाहनों में न तो उचित कवरिंग होती है और न ही ओवरलोडिंग पर नियंत्रण। तेज रफ्तार वाहनों से उड़ती जहरीली राख सड़कों, खेतों और बस्तियों में फैल रही है, जिससे लोगों को सांस की बीमारी, आंखों में जलन और फसलों को नुकसान हो रहा है।

स्वास्थ्य और पर्यावरण पर खतरा

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि नवापारा क्षेत्र के तेंदुआ, घुरदंगी, पिपराडीह सहित कई गांवों की पक्की सड़कें फ्लाईएश से सफेद हो चुकी हैं। बारिश के दिनों में यही राख कीचड़ बन जाती है, जिससे वाहन फिसलते हैं और दुर्घटना का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि मवेशी बीमार पड़ रहे हैं और भूजल दूषित हो रहा है।

एक ग्रामीण नेता ने कहा, “बच्चे स्कूल जाते समय राख में सांस ले रहे हैं। प्रशासन को कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरी में सड़क पर उतरना पड़ा।” वहीं ट्रक चालकों ने सफाई दी कि वे कंपनी के दबाव में परिवहन करने को मजबूर हैं।

प्रशासन और पुलिस मौके पर

सूचना मिलते ही नवापारा तहसीलदार एवं पुलिस बल मौके पर पहुंचे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन ग्रामीण लिखित आश्वासन की मांग पर अड़े रहे। एसडीएम ने बताया कि परिवहन विभाग को ओवरलोडिंग रोकने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि पर्यावरण विभाग से फ्लाईएश निस्तारण की जांच कराई जाएगी। कंपनी प्रबंधन ने दावा किया कि वाहनों में कवरिंग की व्यवस्था है, लेकिन चालक नियमों का उल्लंघन करते हैं।

48 घंटे का अल्टीमेटम

ग्रामीणों ने प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए मांग की है कि फ्लाईएश वाहनों में अनिवार्य कवरिंग, जीपीएस प्रणाली, ओवरलोडिंग पर एफआईआर, नियमित सड़क सफाई तथा रात्रिकालीन या वैकल्पिक मार्ग से परिवहन सुनिश्चित किया जाए। चेतावनी दी गई कि मांगें नहीं मानी गईं तो संभाग स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। दोपहर बाद प्रशासनिक समझाइश के बाद ट्रकों को जाने दिया गया। स्थानीय विधायक ने भी मामले को सदन में उठाने का आश्वासन दिया है। यह घटना औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करती है।

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