पुरानी रंजिश में जानलेवा हमला करने वाले आरोपी को 7 वर्ष का सश्रम कारावास
अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने सुनाया फैसला, अर्थदंड से भी किया दंडित
घरघोड़ा/छाल: माननीय अपर सत्र न्यायालय घरघोड़ा ने जानलेवा हमले के एक गंभीर मामले में त्वरित सुनवाई करते हुए आरोपी प्रताप बरवा को दोषी करार देते हुए 7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला थाना छाल के अंतर्गत वर्ष 2019 में हुई एक हिंसक घटना से जुड़ा है।
क्या था मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 4 अगस्त 2019 की रात करीब 10 बजे की है। प्रार्थी घनाराम और परश राम नावापारा छाल मेन रोड से अपने घर लौट रहे थे। तभी विवेकानंद कान्वेंट स्कूल के पास आरोपी प्रताप बरवा ने उनकी मोटरसाइकिल रोक ली। पुरानी रंजिश को लेकर आरोपी ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी और हाकी स्टीक से प्राणघातक हमला कर दिया।
इस हमले में घनाराम की गर्दन और कमर पर गंभीर चोटें आई थीं, जबकि परश राम के हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों में चोट लगी थी। मौके पर मौजूद विमल राठिया और स्वप्निल सारथी ने बीच-बचाव कर आहतों की जान बचाई और उन्हें तत्काल अस्पताल पहुँचाया।
पुलिस कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया
प्रार्थी शैलेष यादव की सूचना पर तत्कालीन उप निरीक्षक हुलस राम जायसवाल ने आरोपी के विरुद्ध विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। विवेचना के पश्चात पुलिस ने न्यायालय में धारा 307 (हत्या का प्रयास), 323, 341, 294 और 506बी के तहत अभियोग पत्र दाखिल किया।
न्यायालय का फैसला
प्रकरण की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमान अभिषेक शर्मा के न्यायालय में हुई। राज्य की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने प्रभावी पैरवी करते हुए साक्ष्य और तर्क प्रस्तुत किए। सभी गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर विद्वान न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाया।
सुनाई गई सजा का विवरण:
- धारा 307: 07 वर्ष का सश्रम कारावास।
- धारा 323: 06 माह का सश्रम कारावास।
- धारा 506बी: 06 माह का सश्रम कारावास।
- धारा 294: 01 माह का सश्रम कारावास।
- अर्थदंड: विभिन्न धाराओं में कुल 4500 रुपये का जुर्माना।
न्यायालय के इस फैसले ने समाज में कड़ा संदेश दिया है कि कानून का उल्लंघन और हिंसा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
