Janmashtami 2026: देशभर में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम

आधी रात को गूंजेगा ‘नंद के आनंद भयो’मंदिरों में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, रात 11:57 बजे से 12:42 बजे तक विशेष पूजा का शुभ समय
नई दिल्ली/रायपुर, 4 सितंबर 2026। देशभर में आज भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव कृष्ण जन्माष्टमी की धूम है। मथुरा-वृंदावन से लेकर देश के अलग-अलग शहरों तक मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। श्रद्धालु दिनभर उपवास और पूजा-अर्चना कर मध्यरात्रि में भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाने की तैयारी में जुटे हैं।


मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। इसी वजह से जन्माष्टमी की पूजा में आधी रात का समय विशेष महत्व रखता है।45 मिनट रहेगा विशेष पूजा का समयपंचांग के अनुसार इस वर्ष जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की विशेष पूजा के लिए रात 11:57 बजे से 12:42 बजे तक का समय शुभ बताया गया है। इस दौरान श्रद्धालु लड्डू गोपाल का अभिषेक, श्रृंगार, पूजन और आरती कर सकते हैं।
ऐसे करें लड्डू गोपाल का अभिषेक
जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान कृष्ण की प्रतिमा को पहले पंचामृत से स्नान कराया जाता है। इसके बाद गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक किया जाता है। पूजा के दौरान भगवान के मंत्रों का जाप करते हुए उन्हें नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और चंदन का तिलक लगाया जाता है।मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के समय शंख और घंटियां बजाकर जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है। इसके बाद भगवान को भोग लगाकर आरती की जाती है।कान्हा को लगाएं ये भोगजन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को उनकी प्रिय मानी जाने वाली चीजों का भोग लगाया जाता है। इनमें माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, पंचामृत, दूध-मखाने की खीर, फल और मेवे प्रमुख हैं।वृंदावन में विशेष उत्साहश्रीकृष्ण की नगरी मथुरा और वृंदावन में जन्माष्टमी को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं।
मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इस्कॉन मंदिर समेत प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भजन-कीर्तन और विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।कृष्ण के संदेशों को जीवन में अपनाने का पर्वजन्माष्टमी केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके उपदेशों को याद करने का अवसर भी है। गीता में श्रीकृष्ण ने कर्म, धैर्य, धर्म, प्रेम और कर्तव्य के महत्व पर जोर दिया है। उनका संदेश है कि व्यक्ति को अपने कर्म पर ध्यान केंद्रित करते हुए परिणाम की चिंता से मुक्त रहना चाहिए।



