साले की चाकू मारकर हत्या करने वाले आरोपी को उम्रकैद
पीड़ित परिवार को मिलेगी एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति
रायगढ़ (गौरी शंकर गुप्ता)। अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमान अभिषेक शर्मा की अदालत ने हत्या के एक चर्चित मामले में आरोपी दाता राम सारथी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी पर ₹1000 का अर्थदंड भी लगाया है तथा मृतक के आश्रितों को ₹1 लाख की क्षतिपूर्ति राशि दिलाए जाने की अनुशंसा की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना कापू, जिला रायगढ़ के अपराध क्रमांक 58/2026 में आरोपी दाता राम सारथी निवासी मुनुन्द का विवाह उर्मिला सारथी से हुआ था। पति-पत्नी के बीच संबंध सामान्य नहीं होने के कारण उर्मिला अक्सर अपने मायके ग्राम पत्थलगांव खुर्द में रहती थी। घटना से पूर्व वह गर्भवती अवस्था में मायके आई थी, जहां उसने एक पुत्र को जन्म दिया और वहीं रह रही थी।
घटना 1 मई 2022 की शाम लगभग 4 बजे की है, जब आरोपी दाता राम सारथी अपने ससुराल ग्राम पत्थलगांव खुर्द पहुंचा और अपनी पत्नी उर्मिला से एक वर्षीय दूधमुंहे पुत्र को छीनकर ले जाने लगा। उर्मिला, उसकी भाभी तथा भतीजी ने आरोपी को रोकने का प्रयास किया, लेकिन वह बच्चे को लेकर मुख्य सड़क तक पहुंच गया।
इसी दौरान उर्मिला का बड़ा भाई महेश सारथी वहां पहुंचा और आरोपी को बच्चे को ले जाने से मना किया। इस बात से गुस्साए आरोपी ने महेश सारथी पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। आरोपी ने महेश के पेट, पीठ और गर्दन पर वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह पूरी घटना मृतक की पत्नी, बहन और पुत्री के सामने हुई।
मृतक की पत्नी कुसुम सारथी की रिपोर्ट पर थाना कापू में मामला दर्ज किया गया। तत्कालीन विवेचना अधिकारी रमा शंकर तिवारी ने मामले की जांच करते हुए महत्वपूर्ण साक्ष्य संकलित किए, गवाहों के बयान दर्ज किए तथा आरोपी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सभी साक्षियों के बयान और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी दाता राम सारथी को हत्या का दोषी पाया। न्यायालय ने उसे आजीवन कारावास एवं ₹1000 के अर्थदंड से दंडित किया। साथ ही मृतक के आश्रितों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायगढ़ के माध्यम से ₹1 लाख की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान किए जाने की अनुशंसा की।
मामले में राज्य शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने प्रभावी पैरवी की।
