April 26, 2026

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पर कार्रवाई, 15 दिन का वेतन कटा; सेवा समाप्ति की चेतावनी

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रायगढ़ (गौरी शंकर गुप्ता)। सरकारी तंत्र में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ प्रशासन अब सख्त रुख अपनाते हुए लगातार कार्रवाई कर रहा है। इसी क्रम में लैलूंगा के झगरपुर सेक्टर अंतर्गत गोसाईडीह आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता श्रीमती कुन्ती भोय पर ड्यूटी में घोर लापरवाही और लगातार अनुपस्थिति के चलते कड़ी कार्रवाई की गई है। परियोजना अधिकारी, एकीकृत बाल विकास परियोजना (लैलूंगा) द्वारा उन्हें द्वितीय कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 15 दिनों का मानदेय काटने के साथ अंतिम चेतावनी दी गई है।



विभागीय जानकारी के अनुसार 1 अप्रैल 2026 को किए गए निरीक्षण के दौरान गोसाईडीह आंगनबाड़ी केंद्र बंद पाया गया था, जहां कार्यकर्ता कुन्ती भोय और सहायिका दोनों अनुपस्थित थीं। इस पर पहले भी नोटिस जारी किया गया, लेकिन संबंधित कार्यकर्ता द्वारा कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद 7 अप्रैल 2026 को दोबारा किए गए औचक निरीक्षण में भी कुन्ती भोय केंद्र से गायब मिलीं। स्थानीय ग्रामीणों से पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि वह अक्सर अपने कार्यस्थल से अनुपस्थित रहती हैं।

कार्यकर्ता की इस लापरवाही का सीधा असर केंद्र में आने वाले बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ा है, जिन्हें पूरक पोषण आहार, अनौपचारिक शिक्षा और अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था। विभाग ने इसे गंभीर अनियमितता और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ माना है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए परियोजना अधिकारी ने कार्रवाई करते हुए 15 दिनों के वेतन की कटौती का आदेश जारी किया है। साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि भविष्य में पुनः ऐसी लापरवाही सामने आई, तो उनकी सेवा समाप्ति के लिए प्रकरण उच्चाधिकारियों को भेज दिया जाएगा। इसके अलावा कार्यकर्ता को तत्काल उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

इस आदेश की प्रतिलिपि जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग रायगढ़ तथा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को भी प्रेषित की गई है, जिससे यह स्पष्ट है कि विभाग अब ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

यह कार्रवाई उन सभी कर्मचारियों के लिए एक कड़ा संदेश है, जो अपने दायित्वों के प्रति लापरवाही बरतते हुए सरकारी सेवाओं को प्रभावित करते हैं, खासकर जब मामला बच्चों और मातृ कल्याण से जुड़ा हो।

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