महिला दिवस पर बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता: हनुमान मंदिर पार्क में कार्यक्रम, ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ ने फैलाया संदेश
घरघोड़ा (गौरी शंकर गुप्ता)।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में धारावाहिक टोली के हनुमान मंदिर पार्क में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं का उत्साह बढ़ाना और समाज में बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ जागरूकता फैलाना था। इस अवसर पर क्षत्रिय समाज की अध्यक्ष माननीय जया सिंह जूदेव ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि समाज से बाल विवाह को खत्म करने के लिए महिलाओं को आगे आना होगा। उन्होंने सभी महिलाओं से अपील की कि वे न तो बाल विवाह करें और न ही अपने आसपास होने दें। कार्यक्रम के दौरान ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ अभियान की जानकारी भी साझा की गई। इस अभियान के तहत जिले के गांवों और कस्बों में जागरूकता फैलाने के लिए ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ चलाया गया, जिसने लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों और कानूनी पहलुओं के बारे में जागरूक किया। अभियान के दौरान लोगों को यह भी बताया गया कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन है और कानून की नजर में दंडनीय अपराध है। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर चलाए गए 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान के तहत ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ ने लगभग 30 दिनों में 2120 किलोमीटर की यात्रा की। इस दौरान रथ 35 गांवों तक पहुंचा और 7133 से अधिक लोगों को बाल विवाह के खिलाफ अभियान से जोड़ा गया। ‘एक्सेस टू जस्टिस फॉर चिल्ड्रन समर्पित’ के निदेशक डॉ. संदीप शर्मा ने कहा कि यह अभियान केवल प्रतीकात्मक यात्रा नहीं बल्कि समाज में बदलाव लाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि अब पूरी दुनिया यह मानने लगी है कि बाल विवाह कोई सामाजिक परंपरा नहीं बल्कि विवाह की आड़ में बच्चों के साथ होने वाला अपराध है। बाल विवाह बच्चियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर गंभीर प्रभाव डालता है तथा उन्हें कुपोषण, अशिक्षा और गरीबी के दुष्चक्र में धकेल देता है। उन्होंने बताया कि यह अभियान तीन चरणों में चलाया गया। पहले चरण में शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से विद्यार्थियों को जागरूक किया गया। दूसरे चरण में धर्मगुरुओं से अपील की गई कि वे विवाह संपन्न कराने से पहले वर-वधू की आयु की जांच करें और बाल विवाह कराने से इंकार करें। इसके साथ ही कैटरर्स, सजावट करने वालों, बैंक्वेट हॉल संचालकों, बैंड व घोड़ी वालों से भी अपील की गई कि वे बाल विवाह में अपनी सेवाएं न दें, क्योंकि इसमें सहयोग करने पर उन्हें भी सजा हो सकती है। तीसरे चरण में पंचायत स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान में सरकार, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी से इसे जन आंदोलन का रूप मिला। आयोजकों ने विश्वास जताया कि सभी के सहयोग से बाल विवाह मुक्त जशपुर और बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य जल्द ही हासिल किया जा सकेगा।

