March 6, 2026

आईपीएस शशि मोहन सिंह रायगढ़ के नए ‘कप्तान’; रील लाइफ के नायक और रियल लाइफ के जांबाज अफसर की दिलचस्प यात्रा

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घरघोड़ा (गौरी शंकर गुप्ता)। छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित और बहुमुखी प्रतिभा के धनी आईपीएस अधिकारी शशि मोहन सिंह अब रायगढ़ जिले के एसएसपी (SSP) के रूप में कमान संभाल रहे हैं। मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर में अपनी सफल पारी और नवाचारों के बाद, सरकार ने अब उन्हें वित्त मंत्री ओपी चौधरी के गृह जिले रायगढ़ की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। लगभग 28 वर्षों की लंबी सेवा में शशि मोहन सिंह ने न केवल पुलिसिंग में अपनी धाक जमाई है, बल्कि अभिनय, कविता और लेखन के क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है।



लेक्चरर से पुलिस सेवा तक का सफर
मूलतः दुर्ग जिले के रहने वाले शशि मोहन सिंह की प्रारंभिक शिक्षा बिहार में हुई, जिसके बाद उन्होंने भिलाई से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की। 1992 में पीजी करने के बाद उन्होंने बतौर लेक्चरर अपने करियर की शुरुआत की थी। हालांकि, प्रशासनिक सेवा में जाने के जुनून ने उन्हें चैन से बैठने नहीं दिया और तीसरे प्रयास में सफलता हासिल कर वे 1997 में डीएसपी बने। मध्य प्रदेश के होशंगाबाद और भोपाल जैसे शहरों में सेवाएं देने के बाद, राज्य गठन के उपरांत वे छत्तीसगढ़ आ गए। साल 2018 में उन्हें आईपीएस (IPS) अवॉर्ड हुआ और 2012 बैच मिला।

जब अभिनय के लिए लिया दो साल का ‘ब्रेक’
शशि मोहन सिंह की कहानी का सबसे रोचक पहलू उनका अभिनय के प्रति प्रेम है। पांचवीं कक्षा के नाटक ‘तैमूर लंका’ से शुरू हुआ शौक इस कदर परवान चढ़ा कि उन्होंने 2010 से 2012 तक असाधारण अवकाश (Extraordinary Leave) लेकर फिल्मों में हाथ आजमाया। इस दौरान उन्होंने 4 छत्तीसगढ़ी और 4 भोजपुरी सुपरहिट फिल्मों में काम किया। उनकी अदाकारी का लोहा फिल्म इंडस्ट्री ने भी माना और उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया। पुलिसिंग में वापसी के बाद उन्होंने अपनी इस कला को ‘कम्युनिटी पुलिसिंग’ का हिस्सा बना लिया।

अपराधियों के लिए सख्त, जनता के लिए सौम्य
रायगढ़ के नए एसएसपी अपनी तेज-तर्रार कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। जशपुर में तैनाती के दौरान उन्होंने कानून व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ पुलिस और जनता के बीच की दूरी को कम करने के कई सफल प्रयोग किए। वे एक बेहतरीन कवि और लेखक भी हैं, जो अपनी रचनाओं और नाटकों (जैसे ‘साकिया’ और ‘मुखबिर’) के जरिए सामाजिक बुराइयों जैसे नशा और नक्सलवाद पर प्रहार करते हैं। अपराधियों के बीच उनका खौफ है, तो वहीं आम जनता के बीच वे अपने सौम्य और मिलनसार स्वभाव के लिए लोकप्रिय हैं।

कला को बनाया जागरूकता का हथियार
शशि मोहन सिंह का मानना है कि पुलिस की लाठी से ज्यादा असरदार कभी-कभी कला की भाषा होती है। उन्होंने साइबर अपराध, नशा मुक्ति और मानव तस्करी जैसे गंभीर विषयों पर कई शॉर्ट फिल्में और नाटक तैयार किए हैं। रायगढ़ में उनकी पोस्टिंग के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि वे यहां भी कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ जन-जागरूकता के नए आयाम स्थापित करेंगे।

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