स्वच्छता से बदल रही तस्वीर, ‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने साझा कीं देशभर की प्रेरक मिसालें

पटवई के युवाओं से लेकर अमरनाथ यात्रा तक का किया उल्लेख, जनभागीदारी को बताया स्वच्छता अभियान की ताकत
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 137वें एपिसोड में देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे स्वच्छता अभियानों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि जब सफाई किसी सरकारी अभियान के बजाय लोगों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी और सामूहिक संकल्प बन जाती है, तब उसका असर पूरे क्षेत्र की पहचान पर दिखाई देता है।
प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के पटवई गांव के दो युवाओं आकाश और रोहन की पहल का उल्लेख किया। दोनों ने अपने क्षेत्र में फैली गंदगी को देखकर स्वयं सफाई शुरू की। हाथों में कचरे के बैग लेकर निकले इन युवाओं के अभियान से धीरे-धीरे अन्य लोग भी जुड़ते गए। इसके बाद ‘क्लीन-अप पटवई’ नाम से युवाओं की टीम तैयार हुई।
पीएम मोदी के अनुसार, टीम ने अब तक चार गंगा घाटों की सफाई करने के साथ ही एक टन से ज्यादा प्लास्टिक कचरा एकत्र किया है। युवाओं ने तालाबों और अन्य सार्वजनिक स्थानों की सफाई में भी योगदान दिया।
अमरनाथ यात्रा में स्वच्छता के लिए बड़ी पहल
प्रधानमंत्री ने इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा के दौरान स्वच्छता व्यवस्था और श्रद्धालुओं की भागीदारी को भी सराहा। उन्होंने बताया कि चुनौतीपूर्ण पहाड़ी रास्तों पर बड़ी संख्या में स्वच्छता कर्मियों ने लगातार काम किया। यात्रा के दौरान 400 मीट्रिक टन से अधिक कचरे को एकत्र कर उसका निस्तारण और प्रोसेसिंग की गई।
उन्होंने बताया कि इस अभियान में श्रद्धालुओं को भी सक्रिय रूप से जोड़ा गया। 16 हजार से ज्यादा यात्रियों ने स्वच्छता का संकल्प लिया, जबकि 10 हजार से अधिक यात्रियों को ‘रिस्पॉन्सिबल यात्री सर्टिफिकेट’ दिया गया।
कचरे से तैयार हुई स्वच्छ ऊर्जा
अमरनाथ यात्रा के दौरान पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा एक अलग प्रयोग भी किया गया। यात्रा मार्ग पर घोड़ों और खच्चरों से निकलने वाले गोबर को बायोगैस में बदलकर उससे ऊर्जा तैयार की गई। इसी स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल ज्योत प्रज्वलित करने में किया गया।
प्रधानमंत्री ने इसे स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और आस्था को जोड़ने वाली पहल बताया। उन्होंने कहा कि इससे यह संदेश मिलता है कि स्वच्छता केवल कचरा हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और जिम्मेदार व्यवहार से भी जुड़ी है।
लोगों की आदत बने स्वच्छता
पीएम मोदी ने कहा कि किसी गांव, शहर, नदी या धार्मिक स्थल की पहचान वहां के लोगों के व्यवहार से भी निर्धारित होती है। यदि स्वच्छता रोजमर्रा की आदत और सामूहिक जिम्मेदारी बन जाए, तो सार्वजनिक स्थानों की सुंदरता के साथ उनकी गरिमा भी बढ़ती है।
उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में स्वच्छता के लिए काम कर रहे लोगों और समूहों को प्रेरणा का स्रोत बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं।



