सड़क हादसों पर गडकरी की चिंता, बोले- हर घंटे 20 लोगों की मौत, युवाओं की बड़ी संख्या

नई दिल्ली। देश में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भारत में सड़क हादसों में होने वाली मौतों का आंकड़ा बेहद चिंताजनक है और इसे कम करने के लिए सरकार के साथ-साथ आम लोगों की जिम्मेदारी भी तय करनी होगी।
राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को आयोजित सड़क सुरक्षा कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि देश में हर साल करीब पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं दर्ज होती हैं। इन हादसों में लगभग 1.8 लाख लोगों की जान चली जाती है। उन्होंने खास तौर पर इस बात पर चिंता जताई कि सड़क हादसों में मरने वालों में करीब 66 प्रतिशत युवा होते हैं।
हेलमेट नहीं पहनना पड़ रहा भारी
सड़क सुरक्षा के प्रति लापरवाही के गंभीर परिणामों का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष केवल हेलमेट का इस्तेमाल नहीं करने के कारण 54,132 लोगों की मौत हुई। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली कुल मौतों में दोपहिया वाहन चालकों की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत है।
गडकरी के मुताबिक, देश में औसतन हर घंटे करीब 20 लोगों की सड़क हादसों में मौत होती है। उन्होंने इसे ऐसी मानवीय क्षति बताया जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
ब्लैक स्पॉट हटाने पर बड़ा खर्च
सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए दुर्घटना संभावित क्षेत्रों यानी ‘ब्लैक स्पॉट’ को खत्म करने पर भी सरकार का जोर है। गडकरी ने बताया कि ऐसे स्थानों को सुधारने के लिए करीब 40 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
इसके अलावा, सरकार ने देश के 100 ऐसे जिलों की पहचान की है जहां सड़क दुर्घटनाओं की संख्या सबसे अधिक है। इन जिलों में हादसों को रोकने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर विशेष उपाय किए जा रहे हैं।
सड़क नेटवर्क बढ़ा, लेकिन हादसे भी चुनौती
गडकरी ने देश के सड़क नेटवर्क के विस्तार को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क रखने वाला देश बन चुका है और इस मामले में केवल अमेरिका तथा चीन से पीछे है।
हालांकि, सड़क नेटवर्क के विस्तार के बावजूद दुर्घटनाओं और मौतों का बड़ा आंकड़ा गंभीर चुनौती बना हुआ है। उन्होंने स्वीडन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां यातायात अनुशासन और प्रभावी नियमों के कारण सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिणाम हासिल किए गए हैं।
कानून से ज्यादा जरूरी व्यवहार में बदलाव
केंद्रीय मंत्री ने सड़क हादसों की समस्या के पीछे मानवीय व्यवहार को प्रमुख कारणों में से एक बताया। उनके अनुसार, केवल बेहतर सड़कें बनाना या कानूनों को सख्त करना पर्याप्त नहीं है। सड़क का इस्तेमाल करने वाले लोगों की आदतों और रवैये में बदलाव भी जरूरी है।
इसी दिशा में सरकार स्कूल स्तर से सड़क सुरक्षा की समझ विकसित करने पर जोर दे रही है। मंत्रालय की ओर से कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के बीच सड़क सुरक्षा शिक्षा को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि युवा उम्र से ही सुरक्षित यातायात की आदतें विकसित कर सकें।
हादसों से अर्थव्यवस्था को भी नुकसान
गडकरी ने सड़क दुर्घटनाओं के आर्थिक असर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सड़क हादसों के कारण देश की GDP को हर साल लगभग तीन प्रतिशत का नुकसान होता है। ऐसे में सड़क सुरक्षा केवल जान बचाने का मुद्दा नहीं, बल्कि आर्थिक विकास से भी जुड़ा विषय है।
यह कार्यक्रम ICICI Lombard General Insurance की प्रमुख CSR पहल के तहत आयोजित किया गया था। गडकरी ने कहा कि सड़क सुरक्षा को प्रभावी बनाने के लिए सरकार, उद्योग जगत, संस्थानों और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने बुनियादी ढांचे में सुधार, वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने, यातायात नियमों के सख्त पालन और जन-जागरूकता को एक साथ आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उनके मुताबिक, सुरक्षित सड़क व्यवस्था तभी संभव है जब प्रत्येक सड़क उपयोगकर्ता अपनी जिम्मेदारी को समझे और यातायात नियमों का पालन करे।



