केंद्र की योजनाओं का लाभ किसानों और जरूरतमंदों तक पहुंचाने पर जोर

नई दिल्ली/रायपुर, 7 सितंबर। रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने किसानों को समय पर सब्सिडी वाला यूरिया उपलब्ध कराने और सस्ती दवाओं की पहुंच आम लोगों तक बढ़ाने पर जोर दिया है। उन्होंने उर्वरक क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीक आधारित निगरानी और दीर्घकालीन सुधारों की आवश्यकता बताई।
रसायन एवं उर्वरक संबंधी संसदीय समिति की बैठक में शामिल होने के बाद अग्रवाल ने कहा कि किसानों के लिए निर्धारित सब्सिडी वाले यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ उसके उपयोग और आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी को मजबूत किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि उर्वरक विभाग के अनुसार पिछले पांच वर्षों में यूरिया सब्सिडी योजना पर करीब 8.16 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। ऐसे में सब्सिडी का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचाने और संभावित औद्योगिक डायवर्जन को रोकने के लिए तकनीक आधारित निगरानी और आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता आवश्यक है।छत्तीसगढ़ के संदर्भ में सांसद ने कहा कि राज्य की कृषि आवश्यकताओं के अनुरूप यूरिया के आवंटन और आपूर्ति की नियमित समीक्षा से किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है।
अग्रवाल ने कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरक और नमो ड्रोन दीदी जैसी पहलों के विस्तार की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों का प्रभावी उपयोग किसानों की लागत कम करने, उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करने में सहायक हो सकता है। उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने पर भी जोर दिया।जन औषधि केंद्रों के विस्तार पर जोरसांसद बृजमोहन अग्रवाल ने प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के माध्यम से सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि योजना का लाभ अधिक से अधिक जरूरतमंद और मध्यमवर्गीय परिवारों तक पहुंचाने के लिए जन औषधि केंद्रों की उपलब्धता और दवाओं की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए।अग्रवाल के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक देश में 20,547 जन औषधि केंद्र स्थापित हो चुके हैं, जिनमें 10,457 केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। छत्तीसगढ़ में 355 जन औषधि केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।उन्होंने बताया कि जन औषधि केंद्रों में उपलब्ध दवाएं प्रमुख ब्रांडेड दवाओं की तुलना में सामान्यतः 50 से 80 प्रतिशत तक सस्ती हैं। योजना के माध्यम से नागरिकों को 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित संचयी बचत होने का उल्लेख किया गया है।सांसद ने कहा कि जन औषधि योजना के विस्तार के साथ गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के साथ बेहतर समन्वय की भी जरूरत है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में जन औषधि केंद्रों की संख्या और दवाओं की उपलब्धता को और मजबूत करने पर जोर दिया।
