विनयगुण, गुरुभक्ति और मोक्षमार्ग का अद्भुत विवेचन : तीर्थ श्री प्रेम विजय जी महाराज
महाराज साहेब के दिव्य प्रवचन का प्रभावशाली प्रसंग
रायपुर। परम पूज्य श्री तीर्थप्रेम विजयजी महाराज साहेब ने आज उत्तरा्ध्ययन सूत्र के अंतर्गत चल रहे दिव्य प्रवचनों की श्रृंखला में “विनय गुण” पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने शिष्यों के आदर्श स्वरूप को गहराई से समझाते हुए कई प्रेरणादायी प्रसंगों के माध्यम से विनयवान आत्मा की पहचान और उसकी महिमा को उजागर किया। प्रवचन में “उपदेशमाला” ग्रंथ के माध्यम से एक ऐसे शिष्य का उल्लेख किया गया, जिसे सर्वाइकल की समस्या थी और वह गुरुभगवंत की आज्ञा से जंगल में साँप की बाँबी के पास गया। वहाँ वह साँप से सामना करते हुए भी बिना भय के गुरु की आज्ञा का पालन करता है, और अंततः उसी आज्ञा के माध्यम से उसे स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है। यह प्रसंग दर्शाता है कि विनीत शिष्य को गुरु की आज्ञा में पूर्ण श्रद्धा और समर्पण होता है।इसी प्रकार 15वें तीर्थंकर भगवान धर्मनाथ के समवसरण में घटित प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया गया कि किस प्रकार एक तिर्यंच प्राणी (चूहा) अपने भविष्य जन्म में मनुष्य बनकर केवल 8-9 वर्ष की आयु में मोक्ष प्राप्त करता है। यह उदाहरण सिद्ध करता है कि विनय और गुरु भक्ति से आत्मा कितना तीव्र विकास कर सकती है।श्री महाराज साहेब ने त्रिलोचन सूरीश्वरजी महाराज और उनके गुरु यशोदेव सूरीजी के प्रसंग को उद्धृत करते हुए बताया कि विनीत शिष्य किस प्रकार कठिन से कठिन उपवासों को भी गुरु आज्ञा में सहज स्वीकार करता है। त्रिलोचन सूरी ने बुखार की अवस्था में भी 16-16 दिन के उपवासों को विनयपूर्वक ग्रहण किया और मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर हुए।उन्होंने स्पष्ट रूप से विनीत और अविनीत आत्माओं के लक्षण भी बताए –* विनीत आत्मा गुरु की आज्ञा की आकांक्षी और आज्ञाकारी होती है।* अविनीत आत्मा आज्ञा को तोड़ती है या बिना आज्ञा के कार्य करती है।श्री महाराज साहेब ने वर्तमान में श्रावकों में साधु-संतों के प्रति उपजी उदासीनता की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि श्रावकों को गोचरी (भोजन अर्पण) की प्रक्रिया में पूर्ण जागरूकता और श्रद्धा होनी चाहिए। साथ ही गुरुभगवंतों को भी गोचरी के लिए विनयपूर्वक विनती करनी चाहिए। उन्होंने इसे गुरु-शिष्य संबंध की जीवंतता से जोड़ा।

प्रतिदिन की धार्मिक क्रियाएं इस प्रकार निर्धारित हैं:–
प्रातःकाल सुप्रभात अभिषेक* सुबह 9:00 बजे से गुरुभगवंतों का दिव्य प्रवचन* दोपहर 2:30 से 3:30 बजे तक महिलाओं के लिए साध्वी भगवंतों द्वारा विशिष्ट ग्रंथों का स्वाध्याय वाचनविशेष आयोजन – नाकोड़ा भैरव महापूजनरविवार 27 जुलाई को नाकोड़ा भैरव महापूजन का दिव्य आयोजन किया गया है, जिसमें 200 जोड़ों को पूजन में भाग लेने का सौभाग्य मिलेगा। यह पूजन श्रद्धा, सुरक्षा और संकल्प की सिद्धि के लिए किया जाएगा।यह समस्त आयोजन साधकों को आत्मिक शुद्धि, विनयगुण और गुरु भक्ति की ऊँचाईयों की ओर प्रेरित करने वाला है। सभी श्रद्धालुजन समय पर पधारकर इस आध्यात्मिक पर्व का लाभ लें।
