March 6, 2026

पंडित सलिल कृष्ण गुरु कथा वाचक का भव्य स्वागत, पहली बार पहुंचे अपने मामा गांव

0
1112
Spread the love

घरघोड़ाध/लैलूंगा (गौरी शंकर गुप्ता)। आज दोपहर को कथा वाचक पंडित सलिल कृष्ण गुरु जी का आगमन अपने मामा गांव गोसाईडीह में पहली बार हुआ है भांजे के स्वागत में परिवार सहित पूरा गांव शामिल हुआ जिस प्रकार भगवान श्री राम का स्वागत अपने ननिहाल छत्तीसगढ़ में होता है उसी परम्परा से ही कथा वाचक पंडित सलिल कृष्ण गुरु का भी अपने मामा गांव में स्वागत सत्कार किया गया है पंडित सलिल कृष्ण गुरु का जन्म सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के छोटे से गांव सरिया में हुआ मनोहर प्रसाद गुरु के पुत्र हैं माता श्रीमती वंदना गुरू,जहा उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण 2018 तक किए जिसके बाद 2018 से 2023 तक इंदिरा कला संगीत विश्व विद्यालय खैरागढ़ में गायन में एमए की डिग्री हासिल करने के बाद कथा व्यास की पढ़ाई करने उन्होंने भागवताचार्य वृंदावनधाम उत्तर प्रदेश डॉ.श्याम सुंदर परासर एवं आचार्य बद्रीश महाराज के सानिध्य में कथा व्यास का शिक्षा ग्रहण किया पंडित सलिल कृष्ण गुरु शुरू से संगीत में रुचि रखते थे मधुर स्वर से श्रीमंद भागवत कथा से अब हिन्दू धर्म को मजबूत करने का बीड़ा उठाया है पंडित सलिल कृष्ण गुरु वृंदावन से आने के बाद लगातार विभिन्न जिलों में कथा कर रहे है उनके कथा को सुनने भारी संख्या में भक्तों की भीड़ इकठ्ठा हो रही है पंडित सलिल कृष्ण गुरु के मधुर आवाजों से भक्तों को श्रीमद भागवत कथा का रस पान करा रहे है जिससे आने वाले समय में हिन्दू धर्म को मजबूत करने में कामयावि मिलेगी।



श्रीमद भागवत पुराण कथा सुनने से आध्यात्मिक विकास निश्चित है

भगवत कथा सुनाने एवं सुनने से आध्यात्मिक विकास होता है भगवान के दिव्य शिक्षाओं में डूबना यानि आध्यात्मिक जीवन का सफल राह होता है एक कथा वाचक की भूमिका सिर्फ कहानी सुनाने तक सीमित नहीं होती है इसमें शास्त्रों के आध्यात्मिक और दार्शनिक सार को श्रोताओं तक पहुंचाना है श्रीमद भागवत पुराण के पवित्र वर्णन हिन्दू धर्म में एक गहरी आध्यात्मिक महत्ता रखती है यह भगवान कृष्ण की दिव्य शिक्षाओं और धर्म भक्ति एवं जीवन के सार को समझने का एक श्रेष्ठ माध्यम है यदि आप आध्यात्मिकता के प्रति रुचि रखते है तो आपका आध्यात्मिक विकास निश्चित है साथ ही उत्कृष्ट संवाद कौशल से ही श्रोताओं के साथ भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से जुड़ाव होता है समाज सेवा का मार्ग ही जीवन का सार है एक कथा वाचक के रूप में लोगों को धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हुए समाज सेवा करना ही उद्देश्य है अपनी परंपरा को संरक्षित करना भागवत कथा एक मात्र रास्ता है हमारा संस्कृति और परंपरा को संरक्षित करना अर्थात बचाने के साथ वृहद रूप में दुनिया में फैलाने से ही हिन्दू धर्म सुरक्षित रहेगी आज उनके स्वागत में मामा प्रमोद पंडा,शुशील पंडा,मधु पंडा,प्रवीण पंडा,नवीन पंडा,सहित समस्त पंडा परिवार एवं गांव वाले शामिल रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *