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रथयात्रा शुरू होते ही सक्रिय होते हैं ‘खुड़खुडिया’ खिलाड़ी, हार-जीत के दांव में फंसते हैं युवा

घरघोड़ा (गौरी शंकर गुप्ता)। परंपरागत रूप से हर वर्ष रथयात्रा के शुभ अवसर पर नगर में धार्मिक उत्साह और आस्था का माहौल बना रहता है, लेकिन इसके समानांतर कुछ काली छायाएं भी सक्रिय हो जाती हैं। जैसे ही रथयात्रा की शुरुआत होती है, वैसे ही ‘खुड़खुडिया’ जुए का खेल भी परवान चढ़ जाता है। यह खेल अब केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं को जुआ और नशे की दलदल में धकेल रहा है। स्थानीय युवाओं का एक बड़ा वर्ग इस खेल में हार-जीत का दांव लगाने लगता है। शुरुआत में छोटे-मोटे पैसों से खेला जाने वाला यह खेल कुछ ही घंटों में हजारों और कभी-कभी लाखों तक पहुंच जाता है। इस दौरान कई युवा अपना मोबाइल, बाइक, यहां तक कि घर की जमा पूंजी तक गंवा बैठते हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह खेल रात भर चलता है और इसमें दूर-दराज़ से भी लोग आकर भाग लेते हैं। आयोजकों के हौसले बुलंद हैं। यह जुआ अब एक संगठित अवैध धंधे का रूप ले चुका है।



समाजसेवियों की चेतावनी
कई सामाजिक संगठनों और वरिष्ठ नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि रथयात्रा जैसे धार्मिक और पवित्र पर्व को जुए जैसी कुप्रथा से मुक्त रखा जाए। वहीं, माता-पिता से अपील की गई है कि वे अपने बच्चों पर निगरानी रखें और उन्हें इस गलत रास्ते से दूर रखें। यदि समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, तो यह परंपरा की आड़ में बढ़ रहा अपराध क्षेत्र में सामाजिक पतन का बड़ा कारण बन सकता है। आपकी एक चुप्पी कई ज़िंदगियाँ बर्बाद कर सकती है,आवाज़ उठाइए।

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