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रायगढ़ में जल संकट गहराया: 4 माह के लिए ‘वॉटर इमरजेंसी’, बोरिंग मशीनों पर पूर्ण प्रतिबंध

रायगढ़ (गौरीशंकर गुप्ता) | छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में बढ़ते जल संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए ‘वॉटर इमरजेंसी’ घोषित कर दी है। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार 1 अप्रैल से 31 जुलाई 2026 तक जिले में नई बोरिंग मशीनों की खुदाई पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इस अवधि में किसी भी व्यक्ति, कंपनी या संस्था को नए नलकूप (बोरवेल) खोदने की अनुमति नहीं दी जाएगी।



प्रशासन ने यह निर्णय लगातार कम हो रही वर्षा, गिरते भूजल स्तर और अनियंत्रित जल दोहन की गंभीर स्थिति को देखते हुए लिया है। अधिकारियों के अनुसार, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों और कुछ ग्रामीण इलाकों में तेजी से घटते जलस्तर ने पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए संकट खड़ा कर दिया है।

कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रतिबंध अवधि के दौरान बिना अनुमति बोरिंग मशीनों का उपयोग करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और आवश्यक होने पर मशीनों को जब्त भी किया जा सकता है। साथ ही, पहले से मौजूद नलकूपों के उपयोग में भी जल संरक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य कर दिया गया है।

प्रशासन का कहना है कि यह कदम किसी भी प्रकार से व्यापार या कृषि गतिविधियों को बाधित करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि वास्तविक जल संकट से निपटने और भूजल संरक्षण के लिए उठाया गया है। इसके साथ ही नगर निगम और ग्रामीण प्रशासन को वैकल्पिक जल स्रोतों के संरक्षण, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, फिल्टर पॉइंट्स के विकास और जलाशयों के पुनर्जीवन के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

रायगढ़ प्रशासन के इस फैसले को जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जो भविष्य में जल प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक और स्थायी बनाने की ओर संकेत करता है।

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