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तेंदुआ पकड़ने निकले वन अमले के हाथ लगा सागौन का जखीरा

मोहला विकासखंड के ग्राम अमलीडीह का मामला



मोहला(ए)। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में पिछले 15 दिनों से तेंदुआ की लगातार आमद से ग्रामीणों में जहां दहशत का माहौल है। वहीं इसी दहशत ने बुधवार को वन विभाग को एक बड़े अवैध सागौन भंडारण तक पहुंचा दिया। मामला मोहला विकासखंड के ग्राम पंचायत पुतरगोदी के आश्रित ग्राम अमलीडीह गांव का है, जहां तेन्दुआ ने बीती रात बाड़ी में घुसकर सुअर का शिकार किया, लेकिन इसके बाद जो खुलासा हुआ, उसने वन विभाग को भी चौंका दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीण अग्नूराम कोरेटी के बाड़ी से तेन्दुआ ने पालतू सूअर का शिकार किया। इसकी सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। तेन्दुआ के पैरों के निशान का पीछा करते वन कर्मी बाड़ी में पहुंचे, जहां उन्हें सागौन के 70 नग लट्ठे पड़े हुए मिले। बिना किसी अनुमति और खुली जगह में इतनी बड़ी मात्रा में कीमती लकड़ी का होना वन विभाग के लिए बड़ी कार्रवाई का संकेत था।
सागौन के लट्ठे मिले
वन विकास निगम के एसडीओ वीरेंद्र पटेल ने बताया कि तेन्दुआ के शिकार की सूचना पर टीम अमलीडीह पहुंची थी। जांच के दौरान तेन्दुआ के पैरों के निशान हमें लकड़ियों के भंडारण तक ले गए। यह लगभग 70 नग सागौन के लट्ठे हैं, जिन्हें बरामद कर काष्ठागार मोहला लाया गया है। अब यह जांच की जा रही है कि यह लकड़ियां वनभूमि से अवैध रूप से काटी गई है या राजस्व भूमि की है।
किसान ने बताया लकड़ी खुद की है
हालांकि ग्रामीण अग्नूराम कोरेटी ने दावा किया कि लकड़ियां उसकी निजी जमीन की है, लेकिन जब उससे लकड़ी कटाई की अनुमति से संबंधित दस्तावेज मांगे गए, तो कोई वैध प्रमाण नहीं दिखाया गया। बता दें कि सागौन जैसी संरक्षित प्रजाति की कटाई के लिए एसडीएम स्तर से पूर्व अनुमति आवश्यक होती है। जिसकी अनदेखी यहां सामने आई है।

मामले की हो रही विस्तृत जांच
वन विकास निगम अब इस मामले की विस्तृत जांच मे जुटा हुआ है। यह भी देखा जाएगा कि क्या यह कटाई किसी वन माफिया से जुड़ी गतिविधि का हिस्सा है या फिर किसी स्थानीय स्तर पर की गई अवैध कटाई है।

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