March 6, 2026

धन की हानि की पूर्ति संभव, लेकिन समय की नहीं : तीर्थ प्रेम विजय जी म.सा.

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रायपुर। भावोल्लास चातुर्मास समिति एवं विमलनाथ जैन मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित चातुर्मास प्रवचन श्रृंखला के अंतर्गत आज परम पूज्य तीर्थ प्रेम विजय जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में समय की महत्ता पर बल देते हुए कहा, “धन की हानि की भरपाई तो हो सकती है, परंतु समय एक बार निकल जाए तो उसकी पूर्ति असंभव है।” गुरुभगवंत ने 45 आगमों में से एक महत्वपूर्ण आगम ‘चंदा विजयम् पैरणा’ पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह आगम साधना और समाधि के रहस्य को प्रकट करता है। उन्होंने समझाया कि जिस प्रकार कोई राजवैद किसी को सचेत करता है, उससे कहीं अधिक गहराई से एक साधक को अपनी साधना के प्रति जागरूक और एकाग्रचित्त होना चाहिए। प्रवचन में उन्होंने महाभारत प्रसंग का उदाहरण देते हुए आचार्य द्रोणाचार्य द्वारा अपने शिष्यों की परीक्षा का उल्लेख किया, जिसमें अर्जुन की एकाग्रता को सर्वोत्तम बताया गया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अर्जुन ने ‘राधावेद प्रणाली’ के अंतर्गत कठिन परीक्षा में सफलता पाई, उसी प्रकार आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले साधक को भी उच्च स्तर की एकाग्रता विकसित करनी चाहिए।गुरु भगवंत ने आचरण सूत्र का संदर्भ देते हुए कहा, “भगवान महावीर ने कहा है कि जो ‘छड़ मात्र’ (क्षण) को जान लेता है, वही सच्चा पंडित कहलाता है।” उन्होंने बताया कि सत्संग और साधना में तत्क्षण को पहचानना ही आत्मज्ञान की दिशा में पहला कदम है। प्रवचन का समापन करते हुए उन्होंने बताया कि आगामी दिन ‘उत्तराध्ययन सूत्र’ पर विस्तृत प्रवचन प्रस्तुत किया जाएगा।



विशेष कार्यक्रम:

सुप्रभात अभिषेक – प्रतिदिन प्रातः 6:00 से 6:25 बजे तक

गुरुभगवंत द्वारा प्रवचन – प्रतिदिन प्रातः 9:00 से 10:00 बजे तक

महिलाओं के लिए विशेष प्रवचन – प्रतिदिन अपराह्न 2:30 से 3:30 तक (साध्वी भगवंतों द्वारा)

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