gharghodaState

घरघोड़ा की ऐतिहासिक तहसील कार्यालय बदहाली की कगार पर : टपकती छत के नीचे भीग रहे सरकारी दस्तावेज

ब्रिटिश काल में 1928 में हुआ था निर्माण, जर्जर दीवारों और टपकती छत के कारण महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर मंडरा रहा खतरा



घरघोड़ा (गौरी शंकर गुप्ता)। क्षेत्र की प्रशासनिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र रहा घरघोड़ा तहसील कार्यालय आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। करीब 98 साल पुराने इस ऐतिहासिक भवन की स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि यहाँ कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। भवन की छत से पानी टपकने के कारण शासकीय दस्तावेजों को बचाने के लिए कर्मचारियों को तिरपाल और पन्नी का सहारा लेना पड़ रहा है।

ब्रिटिश कालीन विरासत की अनदेखी इतिहास के अनुसार, इस तहसील भवन का उद्घाटन वर्ष 1928 में तत्कालीन ब्रिटिश अधिकारी और पॉलिटिकल एजेंट के.एल.बी. हैमिल्टन द्वारा किया गया था। लगभग एक सदी पुराने इस गौरवशाली भवन की दीवारों में अब बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं और छत का प्लास्टर उखड़कर गिरने लगा है। उचित देखरेख और मरम्मत के अभाव में यह ऐतिहासिक धरोहर अब खंडहर में तब्दील होने की कगार पर है।

तिरपाल के भरोसे सुरक्षित हो रही फाइलें बरसात के दिनों में इस कार्यालय की स्थिति और भी भयावह हो जाती है। खपरैल की छत से लगातार पानी रिसने के कारण कार्यालय के भीतर बैठना मुश्किल हो जाता है। महत्वपूर्ण राजस्व रिकॉर्ड और फाइलों को भीगने से बचाने के लिए कर्मचारी दफ्तर के अंदर ही पन्नी और तिरपाल लगाकर बैठने को मजबूर हैं। बुनियादी सुविधाओं के अभाव और जान जोखिम में डालकर काम करने से कर्मचारियों में भी असुरक्षा का भाव है।

जीर्णोद्धार की उठ रही मांग स्थानीय नागरिकों और क्षेत्रवासियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस ऐतिहासिक महत्व वाले भवन का जल्द से जल्द जीर्णोद्धार कराया जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं कराई गई, तो यह विरासत पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस टपकती छत की सुध कब लेता है और कब इस जर्जर भवन का कायाकल्प होता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button