NHMMI : विशेषज्ञों की चेतावनी: दर्द रहित गांठ को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
रायपुर। अक्सर महिलाएं गंभीर बीमारियों को केवल दर्द से जोड़कर देखती हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हर गंभीर बीमारी दर्द के साथ शुरू हो, यह जरूरी नहीं। NHMMI Hospital Raipur के विशेषज्ञों के अनुसार स्तन या शरीर के अन्य हिस्सों में होने वाली दर्द रहित गांठें भी कैंसर के शुरुआती संकेत हो सकती हैं। इसलिए किसी भी नई या लंबे समय तक बनी रहने वाली गांठ को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

दर्द न होना खतरे से मुक्त होने का संकेत नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार कैंसर की गांठें धीरे-धीरे विकसित होती हैं और प्रारंभिक चरण में नसों को प्रभावित नहीं करतीं, इसलिए वे दर्द रहित रह सकती हैं। यही कारण है कि महिलाएं दर्द न होने पर जांच टाल देती हैं, जिससे बीमारी का पता देर से चलता है।
हर गांठ कैंसर नहीं, लेकिन जांच जरूरी
डॉक्टर बताते हैं कि अधिकांश गांठें हार्मोनल बदलाव, सिस्ट या संक्रमण के कारण भी हो सकती हैं। लेकिन बिना चिकित्सकीय जांच यह तय करना संभव नहीं कि गांठ सामान्य है या गंभीर। यदि गांठ नई हो, सख्त हो, आकार में बढ़ रही हो या लंबे समय तक बनी रहे, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
स्तन ही नहीं, शरीर के अन्य हिस्सों पर भी रखें नजर
सिर्फ स्तन ही नहीं, बल्कि गर्दन, बगल, कमर या पेट में भी दर्द रहित सूजन या गांठ दिखाई दे सकती है। यदि गांठ सख्त, अनियमित या स्थिर महसूस हो और समय के साथ ठीक न हो, तो चिकित्सकीय जांच आवश्यक है।
40 वर्ष के बाद नियमित स्क्रीनिंग है जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार 40 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं को वार्षिक मैमोग्राफी करानी चाहिए। मैमोग्राफी, अल्ट्रासाउंड और क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्जामिनेशन जैसे स्क्रीनिंग टेस्ट लक्षण प्रकट होने से पहले ही बीमारी का पता लगाने में सहायक होते हैं। जिन महिलाओं के परिवार में कैंसर का इतिहास है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार पहले ही जांच शुरू कर देनी चाहिए।
आत्म-परीक्षण से बढ़ती है जागरूकता
नियमित आत्म-परीक्षण से महिलाएं अपने शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को समय रहते पहचान सकती हैं। हालांकि यह पेशेवर जांच का विकल्प नहीं है, लेकिन जागरूकता और सतर्कता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
डर नहीं, जागरूकता है जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारी के डर या सामाजिक संकोच के कारण जांच में देरी नहीं करनी चाहिए। शुरुआती अवस्था में कैंसर का इलाज अधिक प्रभावी और कम जटिल होता है। समय पर परामर्श लेना आत्म-देखभाल और जिम्मेदारी का प्रतीक है।
दर्द गंभीरता का विश्वसनीय पैमाना नहीं है। दर्द रहित गांठ भी खतरनाक हो सकती है। शरीर में कोई भी असामान्य बदलाव महसूस हो तो इंतजार न करें, समय पर जांच ही जीवन बचा सकती है।
