प्रभु श्रीराम के ननिहाल में जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य जी का मंगलमय आगमन; प्रवचन, दर्शन एवं दीक्षा से हजारों भक्त हुए लाभान्वित
स्वधर्म से भटके 240 लोगों ने सनातन धर्म में की वापसी , 74 लोगों ने ली साधक दीक्षा

रायपुर। प्रभु श्रीराम के ननिहाल छत्तीसगढ़ की पावन भूमि पर दही हांडी मैदान, गुढियारी रायपुर में अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य जी (दक्षिण पीठ – नाणीजधाम, महाराष्ट्र) का शुभागमन हुआ। इस अवसर पर आयोजित एक दिवसीय प्रवचन, दर्शन, समस्या मार्गदर्शन एवं दीक्षा समारोह में हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे और जगद्गुरु श्री के अमृतमय वचनों से लाभान्वित हुए। धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, भानुप्रतापपुर, अंबागढ़ चौकी, डोंगरगांव, छुरिया, मोहला मानपुर दुर्ग भिलाई, रायपुर के 240 स्वधर्म से भटके हुए लोगो की शुद्धिकरण कर सनातन धर्म में वापसी कराया गया। 74 लोगो ने आध्यात्मिक उन्नति हेतू साधक दीक्षा ली। कार्यक्रम के शुभारंभ में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ दीप प्रज्वलन किया गया। मंच पर छत्तीसगढ़ के गणमान्य नागरिक, विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी, संत-महंत एवं हजारों की संख्या में भक्त उपस्थित रहे।

जगद्गुरु श्री ने अपने दिव्य प्रवचन में कहा कि —“मनुष्य को अपने जीवन में मन को अध्यात्मवादी, दृष्टि को विज्ञानवादी और बुद्धि को वास्तविकवादी रखना चाहिए। जब मनुष्य इस संतुलन में जीवन जीता है, तब उसके जीवन में शांति, प्रेम और सत्कर्म का प्रवाह स्वतः होता है।” उन्होंने अंधश्रद्धा निर्मूलन के उपक्रम के अंतर्गत मानव जीवन में आध्यात्मिक विज्ञान के समन्वय पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आज के युग में भौतिक सुविधाओं के बावजूद मनुष्य के भीतर से शांति और आनंद लुप्त होते जा रहे हैं, क्योंकि वह आध्यात्मिकता से दूर होता जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान जगद्गुरु श्री ने व्यक्तिगत रूप से अनेक भक्तों की समस्याएँ सुनीं और उन्हें मार्गदर्शन प्रदान किया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दीक्षा प्राप्त कर अपने जीवन में आध्यात्मिक दिशा की नई शुरुआत की।

जगद्गुरु श्री ने अपने प्रवचन में तीन सरल जीवन सूत्र बताए —
- प्रतिदिन 10 मिनट अपने इष्टदेव की एकाग्र भक्ति करें।
- सपने में भी किसी का बुरा न सोचें।
- “आप जियो और दूसरों को जीने में सहायता करो।”
उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य इन तीन बातों को अपने जीवन में उतार ले, तो उसका जीवन स्वतः संतुलित और परमार्थ मय बन जाता है। इस अवसर पर आयोजित विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम स्थल पर पूरे दिन भक्ति संगीत और वैदिक मंत्रोच्चारण से वातावरण भक्तिमय बना रहा। जगद्गुरु नरेंद्राचार्य महाराज संस्थान, नाणीजधाम द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न सामाजिक एवं आध्यात्मिक उपक्रमों की जानकारी भी दी गई, जिनमें –निःशुल्क अन्नदान सेवा, गरीब बच्चों के लिए शिक्षा, राष्ट्रीय राजमार्गों पर एम्बुलेंस सेवा, वृक्षारोपण, निःशुल्क वैद्यकीय सेवा, और अब तक 1.50 लाख से अधिक परिवारों की घर वापसी जैसी उल्लेखनीय सेवाएँ शामिल हैं। जगद्गुरु श्री द्वारा सन 2005 से घर वापसी का कार्य निरंतर जारी है। उसी कड़ी में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। कार्यक्रम का संचालन छत्तीसगढ़ पीठ प्रमुख एवं संप्रदाय के पदाधिकारियों ने किया। रामानंद संप्रदाय छत्तीसगढ़ की ओर से समस्त भक्तगणों ने जगद्गुरु श्री के आशीर्वाद को अपने जीवन का अमूल्य प्रसाद बताया और भविष्य में ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों की निरंतरता की कामना की। कार्यक्रम में प्रबल प्रताप सिंह जूदेव , सच्चिदानंद उपासने छ ग पीठ सदस्य, दीपक लखोटिया , आलोक श्रीवास्तव , नीलकंठ महाराज धर्म संसद आयोजक, संत युधिष्ठिर लाल महाराज (शदाणी दरबार रायपुर ), स्वामी राजेश्वर आनन्द अध्यक्ष संत महासभा रायपुर, महंत देवदास नारायण मंदिर रायपुर आदि उपस्थित थे। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सच्चिदानंद उपासने का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।

जगद्गुरु नरेंद्राचार्य महाराज संस्थान द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न सामाजिक उपक्रम निम्नानुसार हैं
- निशुल्क विद्यालय
- निशुल्क मोटर ट्रेडिंग स्कूल
- निशुल्क चिकित्सालय
- निशुल्क वेद पाठशाला
- बालिकाओं के लिए निशुल्क वेद पाठशाला
- चिकित्सा अध्ययन एवं अनुसंधान हेतु अब तक 159 मरणोपरांत देहदान। अब तक 56537 भक्तों द्वारा देहदान का संकल्प।
- अब तक 88 अंग दान
- प्रतिवर्ष डेढ़ लाख यूनिट रक्त दान
- देश भर के 6 राष्ट्रीय महामार्गों में 53 नग निशुल्क एंबुलेंस सेवा
- 3 लाख से अधिक लोगों की नशामुक्ति
- पर्यावरण संरक्षण संवर्धन के लिए प्रतिवर्ष दांडी यात्रा का आयोजन तथा वृक्षारोपण। इस वर्ष एक पेड़ मां के नाम अंतर्गत सवा लाख से अधिक पौधारोपण।
