चातुर्मास : दादागुरुदेव का हुआ पंच महाभिषेक, लाभार्थी परिवारों ने दादाबाड़ी में की पूजा-अर्चना
रायपुर। गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर दादाबाड़ी मंदिर में गुरुवार को सुबह दादागुरुदेव की पूजा-अर्चना की गई। मंदिर में नागदा के प्रसिद्ध विधिकारक विपिन भाई वागरेचा द्वारा दादागुरुदेव की पंच महाभिषेक क्रियाविधि संपन्न करवाई और संगीतमय माहौल में श्रावक-श्राविकाओं ने प्रभु भक्ति का लाभ लिया। गुरुदेव की वासक्षेप की आंगी रचना का लाभ मोतीलाल, संपतबाई, संतोष, रंजना देवी दुग्गड़ परिवार को मिला। गुरुदेव के प्रथम अभिषेक का लाभ धरमचंद, सुंदर बाई, राजेश, अशोक, मुकेश, समय, रितेश, यश निम्माणी परिवार को मिला। गुरुदेव के द्वितीय अभिषेक का लाभ निर्मला देवी, निशांत कुमार दुग्गड़ परिवार को मिला। गुरुदेव के तृतीय अभिषेक का लाभ निर्मला देवी, अनीश, हर्षवर्धन भंडारी परिवार को मिला। गुरुदेव के चतुर्थ अभिषेक का लाभ हरीश कुमार, मनीष कुमार डागा परिवार को मिला और गुरुदेव के पंचम अभिषेक का लाभ महेश कुमार, वैभव निम्माणी परिवार को मिला। वहीं, गुरुदेव के केसर अभिषेक का लाभ छोटी बाई बुरड़ परिवार, गुढ़ियारी को मिला और गुरुदेव का घी में मुख दर्शन का लाभ मनोहरमल, सजल कुमार बुरड़ परिवार को मिला। इस दौरान ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया एवं कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, राजेंद्र गोलछा समेत चातुर्मास समिति के अध्यक्ष अमित मुणोत एवं समस्त पदाधिकारी मौजूद रहे।


मोक्ष की राह पर गुरु के आशीर्वाद के बिना नहीं चला जा सकता: श्री हंसकीर्ति श्रीजी
दादाबाड़ी में आत्मोत्थान चातुर्मास 2025 के अंतर्गत चल रहे प्रवचन श्रृंखला के दौरान गुरुवार को गुरू पूर्णिमा के अवसर पर परम पूज्य श्री हंसकीर्ति श्रीजी म.सा. ने कहा कि जो व्यक्ति सांसारिक मोह-माया को त्यागकर गुरु के चरणों में समर्पित होता है, उसका जीवन निश्चित ही कल्याण की ओर अग्रसर होता है। आज के समय में अधिकांश लोग अपनी मनमर्जी से जीवन जीना चाहते हैं। स्वतंत्रता की ऐसी परिभाषा बन गई है कि लोग माता-पिता के साथ रहना भी बंधन मानने लगे हैं, तो गुरु को स्वीकारना तो उनके लिए बहुत दूर की बात है। लेकिन यह बंधन नहीं, बल्कि जीवन को मर्यादा और अनुशासन प्रदान करने वाला दिव्य संबंध है।
गुरु के बिना जीवन दिशाहीन होता है। जो व्यक्ति गुरु को त्यागकर स्वेच्छाचारिता अपनाता है, उसका जीवन पशुवत हो जाता है। यदि आप किसी भी ज्ञानी से पूछें कि मोक्ष मार्ग कैसे प्राप्त होगा, तो उत्तर होगा — गुरु की शरण में जाकर। लेकिन जब तक पापों का बोझ सिर पर न चढ़ जाए, तब तक लोग गुरु की ओर रुख नहीं करते, और तब तक मोक्ष की राह अत्यंत कठिन प्रतीत होती है।

गुरु स्वयं भगवान के स्वरूप होते हैं। शिष्य उनके सान्निध्य से ज्ञान प्राप्त करता है, लेकिन आज की स्थिति भिन्न है। थोड़े से ज्ञान से शिष्य स्वयं को पूर्ण ज्ञानी मानने लगता है, और यही उसका पतन का मार्ग बनता है। जो गुरु से हार जाता है, वह मोहिनी कर्म पर विजय प्राप्त करता है, पर जो गुरु को हराना चाहता है, वह मोहिनी कर्म में उलझ जाता है।
गुरु को अपने जीवन का केंद्र बनाकर जो आगे बढ़ता है, उसका जीवन निखरता है। चातुर्मास का यह अवसर आत्मिक रूपांतरण का पर्व है — गुरु कृपा से हमें अपने जीवन की दिशा और दशा दोनों को सुधारने का प्रयास करना चाहिए।
गौतम स्वामी के एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए साध्वीजी ने कहा — जब एक जिज्ञासु ने पूछा कि आप प्रभु को सुबह या शाम कब स्मरण करते हैं, तो स्वामीजी ने कहा, “मैं न सुबह करता हूं, न शाम।” यह सुनकर जिज्ञासु चौंक गया। तब गौतम स्वामी ने समझाया — “हमें प्रभु को इस प्रकार हृदय में बसा लेना चाहिए कि अलग से स्मरण की आवश्यकता ही न पड़े।”

गुरु की कृपा से होते हैं चमत्कार
साध्वी श्रीजी ने आगे कहा — कई बार गुरु की प्रत्यक्ष उपस्थिति में भी जो कार्य नहीं हो पाते, वे केवल उनके आशीर्वाद से पूर्ण हो जाते हैं। गुरु का हर बार प्रत्यक्ष रूप में होना आवश्यक नहीं है, लेकिन उन पर आपकी श्रद्धा, आस्था और समर्पण होना अत्यंत आवश्यक है। यदि गुरु पर आस्था नहीं है, तो आशीर्वाद भी प्राप्त नहीं होता, और तब गुरु का होना अथवा न होना समान हो जाता है।
गुरु केवल ज्ञान का भंडार भर नहीं होते, उनके प्रति हमारा भाव, विश्वास और निष्ठा भी अनिवार्य है। गुरु पूर्णिमा एक आध्यात्मिक पर्व है, जिसमें गुरु की पूजा नहीं, अपितु उनके उपदेशों को जीवन में अपनाना ही सच्ची पूजा है।

साध्वी श्रीजी ने स्पष्ट किया — ‘गुरु’ शब्द दो अक्षरों से बना है — ‘गु’ अर्थात अंधकार और ‘रु’ अर्थात उसे समाप्त करने वाला। जो अज्ञान रूपी अंधकार को मिटा दे, वही सच्चे अर्थों में गुरु होता है। ऐसा गुरु जो संयमी हो, महाव्रतधारी हो, स्वयं संसार-सागर से पार हो और दूसरों को भी पार लगाने में सक्षम हो — वही सच्चा मार्गदर्शक कहलाता है।
आत्मोत्थान चातुर्मास समिति 2025 के अध्यक्ष अमित मुणोत ने बताया कि दादाबाड़ी में सुबह 8.45 से 9.45 बजे साध्वीजी का प्रवचन होगा। आप सभी से निवेदन है कि जिनवाणी का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
