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खनिज माफियाओं पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 7 दिन में 27 वाहन जब्त, घरघोड़ा में बड़ी कार्रवाई का इंतजार

घरघोड़ा (गौरीशंकर गुप्ता)। रायगढ़ जिले में खनिज माफियाओं के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के ‘जीरो टॉलरेंस’ निर्देश के बाद खनिज विभाग ने पिछले सात दिनों में 27 वाहनों को जब्त कर अवैध उत्खनन और परिवहन पर बड़ा प्रहार किया है। इस कार्रवाई से अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।


अलग-अलग थानों में खड़े किए गए जब्त वाहन

जब्त किए गए वाहनों को कलेक्ट्रेट परिसर सहित कोतरा रोड, भूपदेवपुर, पूंजीपथरा और पुसौर थानों में सुरक्षित रखा गया है। विभागीय टीम लगातार निगरानी करते हुए संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।

सिर्फ जब्ती नहीं, कानूनी शिकंजा भी कसा

खनिज निरीक्षक सोमेश्वर सिन्हा और उनकी टीम ने केवल वाहन जब्त करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि आरोपियों पर सख्त कानूनी धाराएं भी लगाई हैं।

  • छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम 2015 के नियम 71 के तहत प्रकरण दर्ज।
  • खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम 1957 की धारा 21 और 23-क के तहत कठोर कार्रवाई।

इन धाराओं के तहत दोष सिद्ध होने पर भारी जुर्माना और सजा का प्रावधान है, जिससे आरोपियों के लिए राहत पाना आसान नहीं होगा।

घरघोड़ा में ‘साय-साय’ एक्शन की मांग

जहां एक ओर शहर और आसपास के क्षेत्रों में सख्ती दिख रही है, वहीं घरघोड़ा क्षेत्र में अब भी अवैध खनन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि दुर्गम और खनिज बहुल इलाकों में सक्रिय बड़े सिंडिकेट पर अब तक अपेक्षित स्तर की कार्रवाई नहीं हुई है। सोशल मीडिया और चौक-चौराहों पर चर्चा तेज है—क्या घरघोड़ा के तथाकथित ‘बड़े मगरमच्छों’ पर भी इसी तरह की ‘साय-साय’ (तेज रफ्तार) कार्रवाई होगी, या फिर छोटे परिवहनकर्ताओं पर कार्रवाई कर मामला शांत कर दिया जाएगा?

प्रशासन की चेतावनी: “यह तो बस शुरुआत है”

कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया है कि अवैध उत्खनन के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। निगरानी दल को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि जहां भी अवैध गतिविधि दिखे, तुरंत कार्रवाई की जाए। विभाग ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे राजस्व की चोरी रोकने में सहयोग करें और अवैध खनन की सूचना गुप्त रूप से प्रशासन तक पहुंचाएं।अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि घरघोड़ा में प्रशासन की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ कब और कितनी प्रभावी साबित होती है।

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