March 6, 2026

सेंट्रल इंडिया की पहली IVUS कार्यशाला में गेस्ट फैकल्टी बने डॉ. स्नेहिल गोस्वामी

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आधुनिक IVUS तकनीक से एंजियोप्लास्टी के बेहतर परिणामों पर हुआ गहन मंथन



भोपाल। सेंट्रल इंडिया में इंट्रावास्कुलर अल्ट्रासाउंड (IVUS) तकनीक पर आधारित पहली ऐतिहासिक कार्यशाला IVUS CONNECT – Learn From the Masters का सफल आयोजन रविवार, 18 जनवरी 2026 को होटल मैरियट, भोपाल में किया गया। यह प्रतिष्ठित शैक्षणिक कार्यक्रम CDEE & CC CON भोपाल 2025 के अंतर्गत आयोजित हुआ, जिसमें देशभर से आए वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्टों ने भाग लिया।

कार्यशाला में लगभग 55 अनुभवी कार्डियोलॉजिस्टों की सक्रिय सहभागिता रही। इस दौरान 11 जटिल क्लिनिकल केसों की प्रस्तुति दी गई, जिनमें एंजियोप्लास्टी के दौरान IVUS तकनीक के प्रभावी उपयोग, सटीक स्टेंट प्लेसमेंट तथा मरीजों के दीर्घकालिक बेहतर परिणामों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कार्डियोलॉजिस्टों को एंजियोप्लास्टी में प्रयुक्त अत्याधुनिक IVUS तकनीक की वैज्ञानिक उपयोगिता से अवगत कराना एवं इसके व्यावहारिक अनुप्रयोग का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण प्रदान करना था, जिससे हृदय रोगियों का उपचार अधिक सुरक्षित, सटीक और प्रभावी बनाया जा सके।

इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक आयोजन में MMI नारायणा हॉस्पिटल, रायपुर के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. स्नेहिल गोस्वामी को विशेष रूप से गेस्ट फैकल्टी एवं IVUS एक्सपर्ट के रूप में आमंत्रित किया गया। डॉ. गोस्वामी ने अपने सत्र में IVUS तकनीक के क्लिनिकल अनुप्रयोग, इसकी वैज्ञानिक महत्ता तथा जटिल कोरोनरी मामलों में इसके उपयोग से मरीजों को मिलने वाले बेहतर क्लिनिकल आउटकम पर विस्तार से प्रकाश डाला।

डॉ. स्नेहिल गोस्वामी ने बताया कि IVUS तकनीक किस प्रकार एंजियोप्लास्टी को अधिक प्रिसाइस, सेफ और रिज़ल्ट-ओरिएंटेड बनाती है। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से प्रतिभागी चिकित्सकों को आधुनिक तकनीक को अपनी दैनिक चिकित्सा प्रक्रिया में शामिल करने की व्यावहारिक समझ मिली।

कार्यशाला के दौरान हैंड्स-ऑन IVUS ट्रेनिंग, केस-बेस्ड डिस्कशन, इंटरएक्टिव सेशन्स एवं IVUS क्विज़ जैसे शैक्षणिक सत्र आयोजित किए गए, जिससे प्रतिभागियों को तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक अनुभव भी प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने एकमत से कहा कि इस प्रकार की उन्नत तकनीक आधारित कार्यशालाएं न केवल चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देती हैं, बल्कि सेंट्रल इंडिया में कार्डियोलॉजी को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

यह IVUS कार्यशाला चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि रही और भविष्य में ऐसे और उन्नत शैक्षणिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए एक मजबूत आधार सिद्ध हुई।

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