जैन शासन विचारों से नहीं, आचारों से चलता है : तीर्थ प्रेम विजय जी म.सा.
रायपुर। भावोल्लास चातुर्मास समिति एवं विमलनाथ जैन मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में चल रहे चातुर्मास प्रवचन श्रृंखला में आज परम पूज्य तीर्थ प्रेम विजय जी म.सा. ने उत्तराध्ययन सूत्र के दसवें अध्ययन पर आधारित प्रवचन दिए। उन्होंने समय के महत्व, उसके प्रबंधन और धर्म के कर्तव्यों पर प्रकाश डाला।

गुरु भगवंत ने कहा कि — “जैन शासन केवल विचारों से नहीं, आचारों से चलता है।” उन्होंने बताया कि समय का सही मूल्यांकन और उचित कार्य का चयन सफलता की कुंजी है। कौन-से समय में कौन-सा कार्य करना उपयुक्त है, इसकी पहचान ही जीवन को सार्थक बनाती है।
समयानुकूल धर्म ही उत्तम धर्म : गुरुदेव ने स्पष्ट किया कि धर्म का आचरण समयानुसार होना चाहिए। जिस समय प्रवचन हो रहे हों, उस समय उसमें उपस्थित होना चाहिए, भले ही घर पर पूजा चल रही हो। प्रवचन सुनने से यह ज्ञान मिलता है कि पूजा को सही ढंग से कैसे किया जाए और धर्म का सच्चा मार्ग क्या है। उन्होंने कहा, “लोग बड़े-बड़े मनोरंजन कार्यक्रमों में तो जाते हैं, परंतु जीवन को दिशा देने वाले प्रवचनों की उपेक्षा करते हैं। धर्म की शिक्षा केवल प्रवचनों से ही मिल सकती है, ना कि किसी प्रदर्शन से।”
समयानुसार कर्तव्य : जब प्रवचन का समय हो, तब पूजा नहीं करनी चाहिए। जब पूजा का योग हो, तब अन्य कार्यों से ध्यान हटाकर पूजा करनी चाहिए। व्यवच (गुरु भोजन) के समय स्वाध्याय नहीं करना चाहिए; उस समय गुरु की सेवा और सहयोग को प्राथमिकता देनी चाहिए। गुरु के गोचरी समय में श्रावक का कर्तव्य है कि सामायिक न लेकर बैठे, जिससे गुरु की गोचरी में व्यवधान न आए।
गुरुदेव ने कहा कि “जब जो कार्य करने योग्य हो, वही उस समय करना चाहिए। तभी वह कार्य लाभकारी सिद्ध होता है।”
परमात्मा का उपकार
प्रवचन के अंत में गुरु भगवंत ने कहा – “परमात्मा का हमारे ऊपर अनंत उपकार है। जब हमें आत्मज्ञान भी नहीं था, तब भी वे हमारी चिंता करते थे। उनका हर उपदेश हमारे कल्याण के लिए है।”
विशेष कार्यक्रम (प्रतिदिन)
सुप्रभात अभिषेक – सुबह 6:00 से 6:25 बजे तक
प्रवचन – सुबह 9:00 से 10:00 बजे तक, पूज्य तीर्थ प्रेम विजय जी म.सा. द्वारा
महिलाओं हेतु विशेष प्रवचन – दोपहर 2:30 से 3:30 बजे तक, साध्वी भगवंतों द्वारा
