भारत एक विशाल देश है, जहां अब मध्यस्थता के लिए लोकप्रियता बढ़ती जा रही है
उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 01 जुलाई 2025 से 31 जुलाई 2025 तक के सत्र को मध्यस्थता के लिए उपयुक्त माना

घरघोड़ा( गौरी शंकर गुप्ता)। माननीय उच्च न्यायालय एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 01 जुलाई 2025 से 31 जुलाई 2025 तक के सत्र को मध्यस्थता के लिए उपयुक्त माना है एवं निर्देश दिया है- भारत एक विशाल देश है, जहां अब मध्यस्थता के लिए लोकप्रियता बढ़ती जा रही है, भारत देश की सभ्यता एवं संस्कृति रही, अपने लिए जीये तो क्या जीये, सर्व भवन्तु सुखिनः हमारा मूलमंत्र रहा, त्याग और शांति हमारे जीवन का उद्देश्य रहा, जहां पर रचनात्मक शक्ति कियाशील होती है, वहां पर विध्वांशात्मक प्रवृत्ति भी सक्रिय हो जाता है, छोटी छोटी बातों में विवाद इतना बढ़ जाता है, कि दंगा और मृत्यु तक की घटनाएं हो जाते है, पंचों के मुख में ईश्वर का वास होता है, हमने प्रेमचंद की कहानी पंच के मुख से परमेश्वर बोलता है पढ़ी व सुनी है, बरगद के पेड़ की छांव में, चैपाल में, लोगों को एकत्र होते हुए देखा है, अपनी समस्याओं को स्वयं सुलझाने की परम्परा को हमने देखा है, आज माननीय उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय भी इस बात पर जोर दे रहे है कि मध्यस्थता के माध्यम से अपनी समस्याओं को अपने विवादों को निपटारा करें। यदि हम मध्यस्थता के माध्यम से न्यायालय द्वारा निर्णय को स्वीकार करते है, तो हमारे विवादों का अंत हो जाता है और हम एक नई सुबह में सांस लेते है तथा हमारा जीवन हरा-भरा उत्साह एवं उमंगों की लहरों में शमा जाता है, हमारा जीवन सुखमय और क्रियाशील हो जाता है। मध्यस्थता आज विदेशों में भी काफी लोकप्रिय हो रहा है, भारत भूमि से यह आवाज निकलकर पूरे विश्व में यह बात फैली हुई है कि मध्यस्थता ही विवादों का निपटारा के लिए एक सफल और उचित माध्यम है, जिसमें न कोई हारता है और न ही कोई जीतता है। उक्ताशय की जानकारी मध्यस्थता प्रभारी घरघोड़ा श्री शंखदेव मिश्रा ने संवाददाता को भेंट में बतायी है। घरघोड़ा न्यायालय से लगभग 40 प्रकरण मध्यस्थता के लिए प्राप्त हुये है।
