चातुर्मास : नवरत्नों व 11 विशिष्ट द्रव्यों से किया गया शक्रोत्सव महाअभिषेक , नाकोड़ा भैरवदेव महापूजन 27 को
बच्चों को दी गई धार्मिक संस्कारों की शिक्षा


रायपुर। हीरसुरी आराधना भवन, रायपुर में शक्रोत्सव महाअभिषेक का भव्य और आध्यात्मिक वातावरण में आयोजन सम्पन्न हुआ। यह अनुष्ठान अहमदाबाद से पधारे विधिकारक अखिलभाई के मंत्रोच्चार, संगीत और विशेष वैदिक विधियों के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर कुल 11 विशिष्ट द्रव्यों और नवरत्नों से प्रभु का महाअभिषेक किया गया। यह शक्रोत्सव भगवान इंद्र द्वारा भगवान के श्रवण कल्याणक से जन्म कल्याणक के मध्य की गई पूजा का प्रतीक है, जिसमें 1 करोड़ 80 लाख कलशों के माध्यम से प्रभु परमात्मा का पवित्र नदियों के जल से अभिषेक किया जाता है। महाअभिषेक की शुरुआत पवित्र नदियों के जल से छोटी बालिकाओं द्वारा की गई, जो इस आयोजन का अत्यंत भावपूर्ण और आकर्षक पहलू रहा।

इस आध्यात्मिक श्रृंखला के अंतर्गत
- प्रत्येक दिन प्रातः सुप्रभात अभिषेक के साथ दिन का शुभारंभ होता है।
- सोमवार और गुरुवार को विशेष अभिषेक के पश्चात मुनि भगवंत के सान्निध्य में महाभक्ताम्बर स्तोत्र का पाठ किया जाता है।
- दोपहर 2 से 3 बजे तक साध्वी भगवंत एवं प्रातः 9 से 10 बजे तक मुनि भगवंत का प्रवचन होता है। प्रवचन में पूज्य पारदर्शी विजय मुनि जी ने “ॐ” शब्द के व्याकरणिक और आध्यात्मिक महत्व को सरल और बोधगम्य रूप में समझाया। उन्होंने बताया कि “ॐ” शब्द अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु – इन पाँच पवित्र तत्वों का समन्वय है।
- कार्यक्रम के दौरान एक बाल धर्म शिविर का आयोजन भी किया गया, जिसमें बच्चों को धार्मिक संस्कारों की शिक्षा दी गई।
इस श्रृंखला का अगला विशेष आयोजन 27 जुलाई को नाकोड़ा भैरवदेव महापूजन के रूप में प्रस्तावित है, जिसमें भी नगरवासियों की बड़ी भागीदारी अपेक्षित है।
