सीएम विष्णुदेव साय के प्रयासों से रेल नेटवर्क से जुड़ेगा जशपुर, केंद्र ने जारी किया राजपत्र
जशपुरनगर (गौरी शंकर गुप्ता)। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर के विकास इतिहास में 13 जून 2026 का दिन एक स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। सुदूर वनांचल और सड़क परिवहन पर पूरी तरह निर्भर जशपुर जिले को रेल नेटवर्क से जोड़ने की बरसों पुरानी मांग आखिरकार पूरी हो गई है। मुख्यमंत्री श्री साय के नीतिगत प्रयासों और लगातार की जा रही पैरवी के बाद केंद्रीय रेल मंत्रालय ने इस बहुप्रतीक्षित रेल परियोजना को हरी झंडी देते हुए भारत के राजपत्र (गजट) में इसका आधिकारिक प्रकाशन कर दिया है। जारी अधिसूचना के अनुसार, ‘धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा’ नई रेल लाइन परियोजना को केंद्र सरकार द्वारा एक ‘विशेष रेल परियोजना’ के रूप में शामिल करते हुए अधिसूचित कर दिया गया है। इस घोषणा के बाद से पूरे जशपुर जिले सहित समूचे छत्तीसगढ़ में उत्साह का माहौल है।
291.881 किलोमीटर लंबी होगी नई रेल लाइन, दो राज्यों को जोड़ेगी आपस में
रेल मंत्रालय द्वारा जारी राजपत्र के अनुसार, यह विशाल और महत्वाकांक्षी रेल परियोजना कुल 291.881 किलोमीटर लंबी होगी। इस नई रेल लाइन का विस्तार छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ से शुरू होकर जशपुर जिले के पत्थलगांव और कुनकुरी जैसे प्रमुख क्षेत्रों से होते हुए पड़ोसी राज्य झारखंड के लोहरदगा तक किया जाएगा। रेल अधिनियम, 1989 के कड़े प्रावधानों के तहत सार्वजनिक हित और राष्ट्रीय अवसंरचना विकास (नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट) के बड़े उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को क्रियान्वित किया जा रहा है। राजपत्र में अधिसूचना के प्रकाशन के साथ ही यह विशेष रेल परियोजना तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है, जिससे भूमि अधिग्रहण और तकनीकी सर्वे के काम को अब तीव्र गति मिलेगी।
सड़क निर्भरता होगी खत्म, वनांचल के ग्रामीणों को मिलेगी सुरक्षित और किफायती यात्रा
भौगोलिक दृष्टि से जशपुर जिला हमेशा से बेहद खूबसूरत लेकिन परिवहन के मामले में बेहद पिछड़ा रहा है। आजादी के बाद से अब तक यह जिला केवल सड़क परिवहन के भरोसे ही सांस ले रहा था। रेल संपर्क न होने की वजह से यहां के वनांचल क्षेत्र के ग्रामीणों, उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाने वाले विद्यार्थियों, गंभीर मरीजों, स्थानीय व्यापारियों और रोजगार की तलाश में बड़े शहरों का रुख करने वाले युवाओं को भारी आर्थिक और शारीरिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इस नई रेल लाइन के मूर्त रूप लेने से जशपुर की कनेक्टिविटी में एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक बदलाव आएगा। क्षेत्र के लोगों को देश के अन्य हिस्सों में आने-जाने के लिए एक सुरक्षित, सुलभ, आधुनिक और बेहद किफायती परिवहन का साधन उपलब्ध हो सकेगा।
किसानों और व्यापारियों की बढ़ेगी आय, राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचेगी जशपुर की उपज
यह रेल परियोजना केवल यात्रा सुगम नहीं करेगी, बल्कि जशपुर जिले के आर्थिक ढांचे को भी पूरी तरह से बदल कर रख देगी। जशपुर जिला अपनी विशेष भौगोलिक स्थिति के कारण बेहतरीन जैविक खेती (ऑर्गेनिक फार्मिंग), सुगंधित जीराफूल धान, मक्का, दलहन, ताजी सब्जियों और बड़े पैमाने पर बागवानी फसलों जैसे लीची, काजू और नाशपाती के उत्पादन के लिए पूरे देश में जाना जाता है। रेल संपर्क स्थापित होने से यहां के स्थानीय किसानों और उद्यानिकी उत्पादकों को अपनी फसलों को बेहद कम लागत में देश के बड़े राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक सीधे पहुंचाने की अद्भुत सुविधा मिलेगी। बिचौलियों का एकाधिकार खत्म होगा और किसानों को उनकी उपज का सही और अधिकतम मूल्य मिल सकेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था बेहद मजबूत होगी।
प्राकृतिक और धार्मिक पर्यटन को लगेंगे पंख, पैदा होंगे रोजगार के हजारों नए अवसर
हरी-भरी वादियों, अनगिनत खूबसूरत जलप्रपातों और गहरी घाटियों से समृद्ध जशपुर जिले में पर्यटन की अपार और असीम संभावनाएं मौजूद हैं। रेल मार्ग शुरू होने से देश-विदेश के पर्यटकों की पहुंच जशपुर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों और पवित्र धार्मिक केंद्रों तक बेहद आसान और सुगम हो जाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर होटल, गाइड्स, टैक्सी और हस्तशिल्प उद्योग को भारी बढ़ावा मिलेगा। रेलवे लाइन के निर्माण कार्य के दौरान और भविष्य में इसके सफल संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों स्थानीय युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। कुल मिलाकर, यह रेल परियोजना आने वाले समय में जशपुर जिले की तस्वीर और तकदीर दोनों को बदलने वाली एक बेहद मजबूत जीवन रेखा (लाइफलाइन) साबित होने जा रही है।
