विनय, श्रद्धा और साधना का पर्व नाकोड़ा भैरव देव महापूजन कल
सरस्वती लघुपूजन संपन्न

रायपुर। परम पूज्य गुरुभगवंत श्री तीर्थप्रेम विजय जी महाराज साहेब के सान्निध्य में चल रहे उत्तरा्ध्ययन सूत्र के पावन वाचन के अंतर्गत आज उन्होंने विनीत और अविनीत शिष्य के लक्षणों पर अत्यंत मार्मिक व प्रेरणादायी प्रवचन दिया। उन्होंने बताया कि विनीत आत्मा अमुखर होती है – यानी बिना आवश्यक कारण के वाणी का प्रयोग नहीं करती, शांति से रहती है, और आत्मविवेचन में लीन रहती है। जबकि अविनीत आत्मा मुखर होती है, निरर्थक, उद्देश्यहीन बातों में उलझी रहती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक व्यक्ति के गुण-अवगुण उसके माता-पिता और गुरु की छवि को भी प्रभावित करते हैं। विनीत व्यक्ति का आचरण अनुशासित होता है – वह गलती होने पर उसे तुरंत स्वीकार करता है, क्षमा माँगता है, और यदि दोष उसका न भी हो, तो भी वह अपने बड़ों की कड़वी बातों को भी धैर्यपूर्वक सुनता है। न तो वह कभी गुरु की निंदा करता है, न ही उनके आसन से ऊँचा बैठता है। विनय धर्म की यही मर्यादा उसे मोक्षमार्ग पर अग्रसर करती है। इस अवसर पर सरस्वती लघुपूजन भी संपन्न हुआ।

कल विशेष आयोजन – नाकोड़ा भैरव देव महापूजन
27 जुलाई प्रातः 8:45 बजे से, भव्य नाकोड़ा भैरव देव महापूजन का आयोजन किया गया है। यह पूजन विख्यात विधिकारक श्री बाबूलालजी एवं मनोजकुमारजी हरण द्वारा सम्पन्न कराया जाएगा। पूजन के उपरांत साधार्मिक भक्ति का आयोजन भी रखा गया है, जिसका विशेष लाभ श्री नाकोड़ा भैरव भक्त मंडल द्वारा लिया जाएगा।
- प्रतिदिन प्रातः 9:00 से 10:00 बजे तक गुरुभगवंतों का प्रभावशाली प्रवचन
- दोपहर 2:30 बजे से – बाल युवा संस्कार सिंचन सिविर, जिसमें 5 से 20 वर्ष तक के बालक-बालिकाओं को धार्मिक, नैतिक एवं जैन संस्कृति के बीज संस्कारों से सिंचित किया जाएगा।
आज के प्रवचन में श्री महाराज साहेब ने यह भी बताया कि “तलवार की धार पर चलना एक बार सरल है, परन्तु परमात्मा के मार्ग पर चलना अत्यंत कठिन है। वह मार्ग वही चल सकता है जिसने विनय धर्म को जीवन में उतार लिया हो।”
यह संपूर्ण कार्यक्रम समाज के हर वर्ग को – विशेषकर युवाओं और श्रद्धालुओं को – संयम, विनय, और गुरु भक्ति की ओर प्रेरित करने वाला है। सभी श्रद्धालुजन समय पर पधारकर इस दिव्य आयोजन का लाभ उठाएं।
