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जूनियर डॉक्टर्स ने चाय बेचकर किया विरोध प्रदर्शन

अंबेडकर अस्पताल के सामने बेची चाय

जूनियर डॉक्टर्स प्रदर्शन स्थल पर ही ओपीडी खोलकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
जूनियर डॉक्टर्स प्रदर्शन स्थल पर ही ओपीडी खोलकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं।

रायपुर। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के सभी 10 मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर स्टाइपेंड और बॉन्ड अवधि कम करने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। इस दौरान अस्पताल के बाहर ओपीडी लगाकर वे मरीजों का इलाज कर रहे हैं लेकिन अस्पताल के भीतर की सेवाएं हड़ताल की वजह से प्रभावित हुई है। हड़ताल के चौथे दिन जूनियर डॉक्टर्स ने चाय बेचकर विरोध प्रदर्शन किया। डॉक्टर्स ने डिग्री के आधार पर मिलने वाले स्टाइपेंड की तरह चाय की भी कैटेगरी निर्धारित की है। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने बताया, जितने स्टाइपेंड के हम हकदार हैं, सरकार उससे कहीं कम स्टाइपेंड दे रही है, ठीक उसी तरह चाय का भी रेट रखा गया है। जूनियर डॉक्टर्स ने कहा, एमबीबीएस चाय की कीमत 5 रुपए है। जिसे वे 2 रुपए में बेच रहे हैं। एमडी/एमएस चाय जो 10 रुपए में मिलनी चाहिए, उसका रेट 5 रुपए रखा गया है। इस तरह स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स वाली चाय 20 रुपए में मिलनी चाहिए, लेकिन उसे भी 5 रुपए में बेच रहे हैं।



दूसरे मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स भी कर रहे हैं हड़ताल

रायपुर के अलावा सरगुजा, कांकेर, जगदलपुर, रायगढ़ और राजनांदगांव के सरकारी मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर्स भी काम बंद कर 31 जुलाई से हड़ताल पर चले गए हैं। इससे पहले एक हफ्ते तक अपनी मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टर्स ने अस्पताल में काली पट्टी लगाकर मरीजों का इलाज किया था। प्रदेश में मेडिकल कॉलेज के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य व्यवस्था जूनियर डॉक्टर्स के ही जिम्मे होती है और इनके हड़ताल पर जाने से सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है।

छत्तीसगढ़ में सबसे कम मानदेय

छत्तीसगढ़ जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के प्रेसिडेंट मनु प्रताप सिंह के मुताबिक राज्य में जूनियर डॉक्टर्स को मिलने वाला स्टाइपेंड दूसरे राज्यों के मुकाबले बेहद कम है। उन्होंने बताया, आस-पास के स्टेट एमपी, झारखंड से भी कम स्टाइपेंड प्रदेश के जूनियर डॉक्टर्स को मिलता है।

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